Bikaner Central Jail: बैरक में बंदी ने फंदा लगाकर दी जान, दो दिन पहले साथी बंदी पर किया था हमला

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Bikaner Central Jail: राजस्थान की सबसे सुरक्षित जेलों में गिनी जाने वाली बीकानेर सेंट्रल जेल से एक गंभीर मामला सामने आया है। जेल परिसर में एक विचाराधीन बंदी दीपक कुमार ने शनिवार तड़के बैरक में फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। मृतक बंदी मूल रूप से श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ क्षेत्र का निवासी था और पिछले कुछ समय से जेल में बंद था। घटना की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन में हलचल मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल अधीक्षक अभिषेक शर्मा तुरंत मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बंदी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिसके चलते उसे सुरक्षा कारणों से अलग सेल में रखा गया था।

सुबह करीब 4 बजे सामने आई घटना:-

जेल प्रशासन के अनुसार शनिवार सुबह नियमित गश्त और बैरकों के निरीक्षण के दौरान सुरक्षा प्रहरियों ने पृथक सेल में बंद दीपक कुमार को अचेत अवस्था में देखा। इसके बाद तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों और जेल की चिकित्सा टीम को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे चिकित्सकों ने जांच के बाद बंदी को मृत घोषित कर दिया।

इसके बाद जेल मैनुअल और न्यायिक नियमों के तहत के तहत स्थानीय पुलिस और संबंधित मजिस्ट्रेट को सूचना दी गई, ताकि नियमानुसार आगे की कानूनी और जांच प्रक्रिया शुरू की जा सके।

मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण अलग सेल में रखा गया था:-

जेल अधीक्षक अभिषेक शर्मा ने बताया कि मृतक बंदी मानसिक रूप से अस्वस्थ था और उसका उपचार जेल की मेडिकल टीम की निगरानी में चल रहा था। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले बंदी ने जेल में एक अन्य कैदी के साथ हिंसक व्यवहार किया था। इसके बाद अन्य बंदियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे सामान्य बैरक से हटाकर पृथक और सुरक्षित सेल में शिफ्ट किया गया था।

पूर्व में भी कर चुका आत्महत्या का प्रयास:-

इस मामले में जो सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, वह यह है कि बंदी दीपक कुमार द्वारा आत्मघाती कदम उठाने का यह पहला मामला नहीं था। जेल रिकॉर्ड्स और अधिकारियों के बयानों के अनुसार, वह पूर्व में भी जेल के भीतर या बाहर आत्मघाती व्यवहार प्रदर्शित कर चुका था और जान देने का असफल प्रयास कर चुका था।

सूरतगढ़ के इस निवासी की मानसिक स्थिति और उसकी इस आत्मघाती प्रवृत्ति के बारे में जेल के सुरक्षा तंत्र को पहले से जानकारी थी। यही वजह थी कि उसकी गतिविधियों पर नजर रखने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन शनिवार सुबह तड़के जब पहरा बदलने और बैरकों के खुलने का समय होता है, उसी बीच उसने मौका पाकर इस घटना को अंजाम दे दिया। इस पुराने इतिहास के सामने आने के बाद अब जेल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल:-

घटना के बाद जेल में बंदियों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि बंदी की मानसिक स्थिति और उसके व्यवहार को लेकर पहले से जानकारी थी, तो उसकी निगरानी को और अधिक मजबूत किया जाना चाहिए था। मामले में किसी स्तर पर चूक हुई या नहीं, इसकी जांच की मांग भी उठ रही है।

न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा पोस्टमार्टम:-

जेल अभिरक्षा के दौरान किसी भी मौत के मामले में नियमानुसार न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसी क्रम में संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और आवश्यक साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू की गई। शव को पीबीएम अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। परिजनों को सूचना दे दी गई है और उनके पहुंचने के बाद नियमानुसार मेडिकल बोर्ड व मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

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