होर्मुज के बाद अब रेड सी पर भी संकट! हूती हमले की आशंका से वैश्विक तेल बाजार में बढ़ी चिंता

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क | Rkhabar

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर एक और बड़ा खतरा मंडराने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव के बीच ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि यदि अमेरिका ईरान के बिजली ढांचे (पावर इंफ्रास्ट्रक्चर) पर हमला करता है, तो यमन के हूती विद्रोही लाल सागर (रेड सी) के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को निशाना बना सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो दुनिया के दो प्रमुख तेल परिवहन मार्ग—होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंडेब—एक साथ प्रभावित हो सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट खड़ा होने की आशंका है।

मामले से जुड़े दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों के अनुसार, ईरानी नेतृत्व ने इस संभावना पर चर्चा की है और अपने सहयोगी हूती संगठन तक संदेश भी पहुंचा दिया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के बिजली ढांचे पर कार्रवाई की चेतावनी के बाद उठाया गया बताया जा रहा है।

बाब अल-मंडेब के पास ड्रोन और मिसाइलें तैनात

सूत्रों के अनुसार, हूती संगठन ने बाब अल-मंडेब क्षेत्र के आसपास रणनीतिक स्थानों पर ड्रोन और मिसाइलें तैनात कर दी हैं। बताया गया है कि यमन के ऊंचे इलाकों से लाल सागर और अदन की खाड़ी पर नजर रखने की व्यवस्था की गई है। हूती संगठन से जुड़े एक सूत्र ने दावा किया कि समुद्री जहाजों पर ड्रोन हमले की तैयारी पूरी है और केवल अंतिम आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाब अल-मंडेब जलमार्ग बाधित होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ेगा। यह मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और मध्य पूर्व से यूरोप व एशिया तक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख रास्ता माना जाता है।

यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ बाब अल-मंडेब भी प्रभावित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इससे दुनिया भर में ईंधन महंगा होने और महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

संघर्ष विराम पर भी मंडराया संकट

रिपोर्टों के अनुसार, हूती संगठन के करीबी सूत्रों का दावा है कि यमन में मौजूद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रतिनिधि यह तय करेंगे कि बाब अल-मंडेब जलमार्ग को कब और कैसे निशाना बनाया जाए।

इसी बीच, हूतियों ने अपने नियंत्रण वाले एक एयरपोर्ट पर कथित बमबारी के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर मिसाइल हमले किए हैं। इससे दोनों पक्षों के बीच चार वर्षों से चला आ रहा संघर्ष विराम भी टूटने की खबरें सामने आई हैं। क्षेत्रीय जानकारों का कहना है कि सऊदी अरब इस खतरे को गंभीरता से ले रहा है और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।

वैश्विक बाजार की नजर मध्य पूर्व पर

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की नजर अब मध्य पूर्व की स्थिति पर टिकी हुई है। यदि ईरान, अमेरिका और हूती संगठन के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।

नोट: यह समाचार अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सूत्रों पर आधारित है। संबंधित पक्षों की ओर से सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

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