Iran Israel War: 1 अप्रैल से कार, टीवी और एसी समेत ये सामान हो सकते हैं महंगे, जानें पूरी खबर

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ईरान संकट के कारण कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं का असर बाजार पर दिख सकता है। कार, दोपहिया वाहन, टीवी, रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर जैसे उत्पाद 1 अप्रैल से महंगे हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इनकी कीमतों में करीब 5-6% तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। कंपनियां बढ़ती इनपुट लागत से परेशान हैं, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में तनाव के चलते प्लास्टिक, रेजिन और पॉलिमर जैसे कच्चे तेल आधारित उत्पाद महंगे हो गए हैं। साथ ही माल ढुलाई दरों में बढ़ोतरी और रुपए की कमजोरी ने भी लागत बढ़ा दी है।

1 अप्रैल से बढ़ सकती हैं कीमतें:-

बताया जा रहा है कि ऑटोमोबाइल कंपनियां कारों की कीमतों में 2-3% तक बढ़ोतरी पर विचार कर रही हैं। वहीं उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण 5-6% तक महंगे हो सकते हैं, क्योंकि इनमें प्लास्टिक के पार्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल होता है। लग्जरी कार निर्माता मर्सिडीज-बेंज और ऑडी ने 1 अप्रैल से अपनी कारों की कीमतें करीब 2% बढ़ाने की घोषणा की है, जबकि अन्य कंपनियां भी कीमतों की समीक्षा कर रही हैं। इसके अलावा जूते, सिंथेटिक फाइबर से बने कपड़े और डेकोरेटिव पेंट भी 9-10% तक महंगे हो सकते हैं।

कच्चे माल की लागत में बड़ा उछाल:-

पिछले एक महीने के दौरान कई जरूरी कच्चे माल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। प्लास्टिक, रेजिन और पॉलिमर की कीमतें लगभग 20-25% तक बढ़ चुकी हैं। वहीं माल ढुलाई दरों में भी करीब 7-10% तक इजाफा हुआ है। पॉलिएस्टर स्टेपल फाइबर के दाम भी 20-25% तक बढ़े हैं। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपए के करीब 2% कमजोर होने से आयातित कच्चे माल की लागत और बढ़ गई है। कारोबारियों का कहना है कि इन सभी कारणों का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।

सप्लायर लगातार बढ़ा रहे दाम:-

उद्योग से जुड़े कई कंपनियों के सीईओ का कहना है कि लागत में तेज बढ़ोतरी के कारण कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। ईरान संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, सप्लाई चेन में रुकावट और माल ढुलाई महंगी होने से उत्पादों की लागत लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जीएसटी कटौती का फायदा भी कम हो सकता है। गोदरेज एंटरप्राइजेज के कमल नंदी के अनुसार कच्चे माल के सप्लायर लगातार कीमतें बढ़ा रहे हैं और बाजार की अनिश्चितता के कारण लंबी अवधि के समझौते करने से भी बच रहे हैं।

आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ता दबाव:-

उद्योग जगत के अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा हालात में कंपनियां केवल 7 से 15 दिन की सप्लाई प्लानिंग के आधार पर काम कर रही हैं। कुछ कंपनियां कच्चे माल की कीमत तय करने के लिए “फोर्स मेज्योर” प्रावधान का भी सहारा ले रही हैं, जिससे उन्हें अनुबंध की सामान्य शर्तों से अलग जाकर कीमत तय करने की अनुमति मिल जाती है।

हायर इंडिया के अध्यक्ष सतीश एनएस के मुताबिक कंपनी अपने सप्लायर के साथ कच्चे माल की आपूर्ति अवधि बढ़ाने को लेकर बातचीत कर रही है, क्योंकि शुरुआती शिपमेंट में देरी हो रही है। वहीं बिस्कुट, साबुन और शैम्पू जैसे उत्पाद बनाने वाली कंपनियां भी बढ़ती लागत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।