पाकिस्तान की नई साजिश? महिलाओं के जरिए स्लीपर सेल तैयार करने की आशंका, जयपुर गिरफ्तारी के बाद जांच तेज

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पाकिस्तान की नई साजिश? महिलाओं के जरिए स्लीपर सेल तैयार करने की आशंका, जयपुर गिरफ्तारी के बाद जांच तेज

जयपुर। Rkhabar

पाकिस्तान समर्थित आतंकी और जासूसी नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। हालिया जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) अब अपनी रणनीति बदलते हुए महिलाओं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भारत में कथित तौर पर स्लीपर सेल तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। जयपुर से एक महिला की गिरफ्तारी और हरियाणा की एक यूट्यूबर समेत कुछ अन्य लोगों के कथित संपर्कों की जांच के बाद एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहन पड़ताल में जुटी हैं।

सोशल मीडिया बना नया हथियार

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और उससे जुड़े नेटवर्क मुख्य रूप से संवेदनशील सूचनाएं जुटाने के लिए सैन्य या रणनीतिक महत्व वाले लोगों को निशाना बनाते थे। अब जांच में सामने आ रहा है कि सोशल मीडिया, भावनात्मक रिश्ते, फर्जी पहचान और ऑनलाइन चैटिंग के जरिए युवाओं और महिलाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है।

एजेंसियों का कहना है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर पहले दोस्ती की जाती है। इसके बाद धीरे-धीरे विश्वास कायम कर कथित तौर पर संवेदनशील जानकारी हासिल करने, कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने या नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

जयपुर में महिला की गिरफ्तारी बनी जांच का केंद्र

राजस्थान एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने जून 2026 में जयपुर निवासी बबीता को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार महिला के कथित संबंध जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नेटवर्क से पाए गए। उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल उसके मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके संपर्क किन-किन लोगों से थे और नेटवर्क कितना व्यापक था।

राजस्थान में इस तरह के मामले में किसी महिला की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां महत्वपूर्ण मान रही हैं।

पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों तक फैली जांच

इसी दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध मोहम्मद हमीम मंडल की कथित सहयोगी अर्पिता सरकार को भी गिरफ्तार किया। एजेंसियां दोनों मामलों के बीच संभावित कड़ियों की जांच कर रही हैं।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश की मीरा और हरियाणा की एक यूट्यूबर ज्योति का नाम भी पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क से कथित संपर्कों के संबंध में जांच के दायरे में आया है। हालांकि इन मामलों में जांच अभी जारी है और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष या दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

बदलती रणनीति से बढ़ी चुनौती

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकी संगठनों ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। पहले सीमित संख्या में लोगों को जोड़कर नेटवर्क तैयार किए जाते थे, लेकिन अब इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच बनाना आसान हो गया है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि फर्जी पहचान, विदेशी नंबरों से संपर्क, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर अपनी गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की जा रही है। इसी कारण साइबर निगरानी और डिजिटल फॉरेंसिक जांच को भी मजबूत किया गया है।

सुरक्षा एजेंसियों की लोगों से अपील

एजेंसियों ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति से दोस्ती करने, विदेशी नंबरों से आने वाले संदेशों या संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों को हल्के में न लें। यदि कोई व्यक्ति संवेदनशील जानकारी मांगता है, आर्थिक मदद का लालच देता है या संदिग्ध बातचीत करता है, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या संबंधित सुरक्षा एजेंसी को दें।

जांच जारी, निष्कर्ष आना बाकी

सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि कई मामलों में जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। जिन लोगों के नाम जांच के दायरे में आए हैं, उनके संबंध में जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किसी प्रकार का अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा। फिलहाल एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल कर रही हैं।

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