मदन राठौड़ को काले झंडे दिखाने का मामला: एसपी-तहसीलदार के बाद अब कुचामन सिटी SHO पर भी गिरी गाज

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नागौर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को काले झंडे दिखाए जाने के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। कुचामन सिटी थाना प्रभारी सतपाल सिंह सिहाग को निलंबित कर दिया गया है। इस संबंध में आईजी राजेंद्र सिंह ने शनिवार देर रात आदेश जारी किए। इससे पहले डीडवाना-कुचामन के पुलिस अधीक्षक ज्ञानचंद्र यादव और कुचामन तहसीलदार कैलाश ईनाणिया का तबादला किया जा चुका है। लगातार हो रही प्रशासनिक कार्रवाई को स्थानीय स्तर पर राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्यारेलाल शिवरान होंगे नए एसपी:-

डीडवाना-कुचामन जिले में अब पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी प्यारेलाल शिवरान संभालेंगे। वर्तमान एसपी ज्ञानचंद्र यादव का तबादला कर उन्हें सिविल राइट्स जयपुर भेजा गया है। खास बात यह है कि यादव ने हाल ही में जिले का कार्यभार संभाला था, ऐसे में उनका अचानक तबादला चर्चाओं में बना हुआ है।

जमानत के बाद फिर हुई कार्रवाई:-

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को भाजपा के पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026 के तहत आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने कुचामन पहुंचे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को आरएलपी कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध जताया था। इसके बाद पुलिस ने कुछ कार्यकर्ताओं को शांतिभंग के आरोप में हिरासत में लेकर मकराना थाने भेज दिया।

बाद में देर रात उन्हें कुचामन लाकर तहसीलदार कैलाश ईनाणिया के समक्ष पेश किया गया, जहां वैधानिक प्रक्रिया पूरी करते हुए जमानत मंजूर कर रिहा कर दिया गया। हालांकि, इसके बाद नावां पुलिस ने आरएलपी के युवा नेता रामनिवास पोषक और एक अन्य युवक रमेश कुमार को अलग मामले में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, पोषक पर पूर्व में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के काफिले के सामने विरोध प्रदर्शन करने का आरोप है।

दोनों आरोपियों को भेजा गया जेल:-

गिरफ्तार किए गए रामनिवास पोषक और रमेश कुमार को शनिवार देर शाम नावां न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए।

विरोध प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद:-

शुक्रवार को कुचामन में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के दौरे के दौरान आरएलपी कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर सरकार विरोधी नारे लगाए थे। जवाहर स्कूल के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। घटना के बाद राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता नजर आ रहा है।