US Attack on Iran: ईरान पर अमेरिका का एक और बड़ा हमला, हॉर्मुज के पास 90 मिनट तक चला ऑपरेशन, बढ़ा मध्य पूर्व में तनाव

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नई दिल्ली | Rkhabar

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि 15 जुलाई को ईरान के रणनीतिक महत्व वाले ग्रेटर टुनब (Greater Tunb) द्वीप पर लगभग 90 मिनट तक सटीक हवाई अभियान चलाया गया। इस दौरान ईरान के तटीय रक्षा तंत्र (Coastal Defense Systems) और क्रूज़ मिसाइल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।

CENTCOM के अनुसार, यह ऑपरेशन पूर्वी अमेरिकी समयानुसार सुबह 7:30 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 5 बजे) शुरू हुआ। अमेरिकी सेना का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की क्षमता को कम करना था।

रणनीतिक रूप से अहम है ग्रेटर टुनब द्वीप

ग्रेटर टुनब द्वीप हॉर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित है और इसे ईरान की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

अमेरिकी सेना का दावा है कि हमले में ईरान के क्रूज़ मिसाइल लॉन्च साइट्स और तटीय रक्षा प्रणालियों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

CENTCOM का दावा—आत्मरक्षा में की कार्रवाई

CENTCOM ने जारी बयान में कहा कि यह अभियान आत्मरक्षा और क्षेत्र में अमेरिकी तथा सहयोगी देशों के हितों की सुरक्षा के लिए चलाया गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि भविष्य में भी खतरा बना रहा तो अमेरिका आगे भी इसी तरह की कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

ईरान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

समाचार लिखे जाने तक ईरान की ओर से इस हमले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। हालांकि, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि ईरान संभावित जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। यदि ऐसा होता है तो क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ सकता है।

पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं दोनों देश

पिछले कई सप्ताह से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा था। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय गतिविधियों और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। इससे पहले भी ईरान पर अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने और अमेरिका द्वारा जवाबी कार्रवाई किए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

वैश्विक चिंता बढ़ी

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। चीन और रूस जैसे देशों ने पहले भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आलोचना की है, जबकि पश्चिमी देशों का कहना है कि क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बनाए रखना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

नोट: यह समाचार अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के दावों और उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों पर आधारित है। स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है तथा ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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