Rajasthan: गहने चोरी मामले की जांच में तांत्रिक का सहारा लेने पर हाईकोर्ट सख्त, जांच अधिकारी बदलने के आदेश; जानें पूरा मामला

राजस्थान में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां चोरी के मामले की जांच के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर जिले के एक प्रकरण में कथित तौर पर तांत्रिक के आधार पर जांच किए जाने को गंभीरता से लेते हुए सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी आपराधिक मामले की जांच वैज्ञानिक और कानूनी आधार पर होनी चाहिए, न कि अंधविश्वास या तांत्रिक की राय पर।
जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए नागौर पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति मिलने के 15 दिन के भीतर मामले की जांच श्रीबालाजी थाने से हटाकर किसी अन्य थाने के सब-इंस्पेक्टर या उससे वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए।
क्या है मामला?
मामला नागौर जिले के श्रीबालाजी थाना क्षेत्र के उटवालिया गांव का है। यहां रहने वाली खेमी देवी ने मार्च 2026 में शिकायत दर्ज कराई थी कि 7 मार्च की रात उनके घर से सोने-चांदी के गहने और नकदी चोरी हो गई। शिकायत में करीब डेढ़ तोला सोना, 300 तोला चांदी के आभूषण और 24 हजार रुपए कैश शामिल थे, जिसकी कुल कीमत 12 लाख रुपए से अधिक बताई गई।
पीड़ित पक्ष का कहना था कि उन्होंने कुछ संदिग्धों के नाम भी पुलिस को बताए थे, लेकिन जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। इसके बाद मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
तफ्तीश पर उठे सवाल:-
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनोहर सिंह राठौड़ ने अदालत के सामने पुलिस की कार्यशैली की पोल खोली। उन्होंने बताया कि जांच अधिकारी ने मामले की पड़ताल के दौरान वैज्ञानिक जांच की बजाय कथित तौर पर तांत्रिक की मदद लेने की कोशिश की।
आरोप है कि हेड कांस्टेबल रतिराम चोरी का सुराग पाने के लिए फरियादी की बहू के पिता और गांव के कुछ अन्य बुजुर्गों को गाड़ी में बैठाकर अलवर जिले में स्थित एक तांत्रिक के ठिकाने पर ले गया।
वकील के अनुसार, वहां तांत्रिक ने अजीबोगरीब दावा करते हुए इशारा किया कि इस चोरी के पीछे खुद बहू के पिता का ही हाथ है। इस ‘तांत्रिक ज्ञान’ को पाकर पुलिस ने बिना किसी ठोस सबूत या गवाह के, बहू के पिता को ही मुख्य संदिग्ध मान लिया और उन्हें फंसाने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी:-
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि जांच अधिकारी किसी तांत्रिक के संपर्क में गया है, तो इससे जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि लोकतांत्रिक और विधि-आधारित व्यवस्था में किसी आपराधिक मामले की जांच अंधविश्वास या बाहरी प्रभावों के आधार पर नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने निष्पक्ष, स्वतंत्र और वैज्ञानिक तरीके से दोबारा जांच की आवश्यकता बताते हुए जांच अधिकारी बदलने के निर्देश जारी किए।
घटनाक्रम एक नजर में:-
- 7 मार्च: परिवार की गैरमौजूदगी में घर में चोरी की घटना
- 8 मार्च: श्रीबालाजी थाने में एफआईआर दर्ज
- 8 मई: हाईकोर्ट में याचिका दाखिल
- 18 मई: मामले पर सुनवाई और जांच अधिकारी बदलने का आदेश जारी