राघव चड्ढा का AAP से इस्तीफा, बोले- दो-तिहाई सांसदों संग BJP में शामिल होने की तैयारी

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर आम आदमी पार्टी से अपने इस्तीफे का औपचारिक ऐलान कर दिया। राघव ने भावुक अंदाज़ में कहा कि आम आदमी पार्टी अब उन आदर्शों और बुनियादी मूल्यों से पूरी तरह भटक चुकी है, जिनके आधार पर इसकी स्थापना हुई थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं आम आदमी पार्टी से दूर जा रहा हूं और अब सीधे जनता के बीच जाने का फैसला कर रहा हूं।”
राघव चड्ढा ने इस दौरान एक तीखी और चुटीली टिप्पणी करते हुए खुद को “गलत पार्टी में सही आदमी” बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर अब वे घुटन महसूस कर रहे थे, क्योंकि पार्टी का मौजूदा स्वरूप उसके शुरुआती सिद्धांतों और विज़न से मेल नहीं खाता। उनके मुताबिक, पिछले कुछ समय से यह असहजता लगातार बढ़ती जा रही थी।
राघव चड्ढा ने दावा किया कि उनके साथ आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के दो-तिहाई से ज्यादा सांसद हैं और इस संबंध में कई सांसदों ने समर्थन में हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि इस समूह में हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल सहित कई नेता शामिल हैं। गौरतलब है कि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद हैं, जिनमें 7 पंजाब और 3 दिल्ली से हैं।
संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने कहा, “हमने यह निर्णय लिया है कि राज्यसभा में AAP के लगभग दो-तिहाई सदस्य भारत के संविधान के प्रावधानों के तहत खुद को भारतीय जनता पार्टी में विलय कर देंगे।” उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने इस पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के करीब 15 साल इसमें समर्पित किए, लेकिन अब पार्टी अपने मूल सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिकता से भटक गई है।
राघव ने आरोप लगाया कि पार्टी अब देशहित की बजाय निजी हितों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों से मुझे लगातार यह महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं। इसलिए आज “मैं पार्टी से दूर होकर अब सीधे जनता के बीच जाने का फैसला कर रहा हूं।”
इस घटनाक्रम से पहले भी पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत मिल चुके थे। दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान स्वाति मालीवाल ने भी बगावती रुख अपनाया था। अब राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के पार्टी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने से AAP को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के पास पहले कुल 10 सांसद थे, लेकिन इस ताजा घटनाक्रम के बाद पार्टी की ताकत आधी से भी कम होती नजर आ रही है। इससे अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। इस बड़ी टूट ने न सिर्फ पार्टी की संगठनात्मक एकता बल्कि उसके भविष्य को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।