तरबूज-खरबूज खाना सेहत पर पड़ा भारी, राजस्थान में एक ही परिवार के 5 सस्दय बीमार, डॉक्टर ने बताया कैमिकल जांच का तरीका

Food Poisoning For Watermelon-Muskmelon: गर्मी में राहत देने वाले तरबूज और खरबूजे अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगे हैं। फलों को जल्दी पकाने और ज्यादा मुनाफे के लिए फलों में इंजेक्शन, केमिकल और पेस्टीसाइड का इस्तेमाल किया जा रहा है जो फूड पॉइजनिंग का बड़ा कारण बनता जा रहा है। बता दें कि इन जहरीले फलों को खाने के बाद लोगों को उल्टी-दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में बिना जांचे-परखे फल खरीदना और सेवन करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ कस्बे में तरबूज-खरबूजे के सेवन के बाद एक परिवार के कई सदस्यों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया। वहीं कस्बे के चूणा चौक क्षेत्र में एक युवती कथित रूप से तरबूज का जूस पीने के बाद बेहोश हो गई।
नवलगढ़ कस्बे में गर्मी से राहत के लिए घर लाए गए फल एक परिवार के लिए परेशानी का कारण बन गए। जानकारी के अनुसार वार्ड 36 निवासी श्रीराम शर्मा, उनकी माता सुमित्रा देवी (60), पत्नी ज्योति देवी (35) और बेटियां आरोही (11) व प्रियांशी (6) की तबीयत खरबूजे का जूस पीने के कुछ समय बाद बिगड़ गई। परिवार के सदस्यों को उल्टी और दस्त की शिकायत होने पर पड़ोसियों की मदद से राजकीय जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
परिवार का कहना है कि घर लाया गया एक तरबूज अंदर से खराब निकला, जिसे फेंक दिया गया। इसके बाद खरबूजे का जूस तैयार किया गया। कुछ समय बाद परिवार के सदस्यों की तबीयत बिगड़ने लगी। अस्पताल में उपचार के बाद कुछ लोगों को छुट्टी दे दी गई, जबकि एक सदस्य को चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया।
रविवार शाम करीब सात बजे शहर के चूणा चौक स्थित एक नाई की दुकान पर उस समय अफरा-तफरी मच गई। जब वहां बैठी एक युवती अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी। दुकानदार और आसपास के लोगों ने तुरंत पास के निजी क्लिनिक से चिकित्सक को बुलाया। प्राथमिक उपचार और पानी के छींटे मारने के करीब 15-20 मिनट बाद युवती को होश आया। युवती ने बताया कि उसने करीब एक घंटे पहले तरबूज का ज्यूस पिया था।
राजकीय जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संदीप चौधरी बताते हैं कि इन दिनों तरबूज, खरबूजा और आम खाने से फूड पॉइजनिंग के मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि आम को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायन तथा तरबूज-खरबूजे में मिठास और चमक बढ़ाने के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि फलों में मौजूद रसायन पेट में पहुंचते ही आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं, जिससे उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर स्थिति गंभीर भी हो सकती है।
डॉ. चौधरी ने लोगों को सलाह दी कि गर्मी के मौसम में केवल विश्वसनीय किसान से ही फल खरीदें। उन्होंने बताया कि तरबूज की जांच के लिए उसकी गिरी का छोटा टुकड़ा गुनगुने पानी में डालें। यदि पानी लाल हो जाए तो समझना चाहिए कि उसमें कलरिंग एजेंट या कृत्रिम मिठास का इस्तेमाल किया गया है। वहीं बिना रसायन वाले तरबूज से पानी का रंग नहीं बदलता। उन्होंने लोगों से पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से पके आम और ऑर्गेनिक तरीके से उगाए गए फलों को प्राथमिकता देने की अपील की।