डिजिटल सुरक्षा के भरोसे में न रहें: स्मार्ट लॉक से लेकर फेस आईडी तक, इमरजेंसी में एक चाबी भी जरूरी

बिजली, बैटरी, इंटरनेट या सर्वर फेल हुआ तो स्मार्ट सिस्टम दे सकते हैं धोखा; विशेषज्ञों ने सुझाया बैकअप प्लान
नई दिल्ली। Rkhabar
स्मार्ट तकनीक ने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को काफी आसान बना दिया है। अब घर के दरवाजे से लेकर कार और गेट तक को स्मार्ट लॉक, डिजिटल की-पैड, फेस आईडी, मोबाइल ऐप और बायोमेट्रिक सिस्टम से नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन जिस तकनीक पर हम सुविधा के लिए निर्भर हो रहे हैं, वही आपातकाल में परेशानी का कारण भी बन सकती है।
कल्पना कीजिए कि रात के समय घर का स्मार्ट लॉक अचानक काम करना बंद कर दे, मोबाइल की बैटरी खत्म हो जाए, इंटरनेट कनेक्शन चला जाए या सर्वर में तकनीकी खराबी आ जाए। ऐसी स्थिति में अगर घर में प्रवेश का कोई वैकल्पिक रास्ता या मैनुअल चाबी उपलब्ध नहीं है तो छोटी-सी तकनीकी समस्या गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
इसीलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि स्मार्ट डिवाइस इस्तेमाल करें, लेकिन उनकी पूरी निर्भरता पर न रहें। हर महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम के साथ पारंपरिक बैकअप जरूर रखें।
5 स्मार्ट सिस्टम, जिनमें बैकअप जरूरी
- बिना चाबी वाला स्मार्ट लॉक
ऐसे स्मार्ट लॉक में सामान्य चाबी का इस्तेमाल नहीं होता। बैटरी खत्म होने या तकनीकी खराबी की स्थिति में दरवाजा खोलना मुश्किल हो सकता है। इसलिए फिजिकल चाबी या वैकल्पिक अनलॉक व्यवस्था सुरक्षित स्थान पर रखना जरूरी है।
- मैग्नेटिक और ऑटोमेटेड गेट
बिजली चली जाए या इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में खराबी आ जाए तो मोटर से चलने वाले गेट लॉक हो सकते हैं। इससे बाहर से मदद लेने या अंदर-बाहर आने-जाने का रास्ता प्रभावित हो सकता है। ऐसे गेट में मैनुअल रिलीज सिस्टम होना चाहिए।
- ऐप और वाई-फाई पर निर्भर स्मार्ट लॉक
कई स्मार्ट लॉक मोबाइल ऐप और इंटरनेट से संचालित होते हैं। इंटरनेट या बिजली बंद होने पर क्लाउड-कनेक्टेड सिस्टम प्रभावित हो सकता है। इसलिए ऐप के साथ ऑफलाइन या स्थानीय बैकअप विकल्प भी रखना जरूरी है।
- डिजिटल कार और ऐप आधारित चाबी
कुछ आधुनिक वाहनों में मोबाइल ऐप या डिजिटल सिस्टम से लॉक-अनलॉक की सुविधा मिलती है। फोन की बैटरी खत्म होने, ऐप में समस्या आने या सिस्टम फेल होने पर परेशानी हो सकती है। ऐसे मामलों में निर्माता द्वारा उपलब्ध वैकल्पिक चाबी या इमरजेंसी एक्सेस व्यवस्था का पता पहले से होना चाहिए।
- वाई-फाई आधारित स्मार्ट पैनिक/मेडिकल बटन
बुजुर्गों या जरूरतमंद लोगों की सुरक्षा के लिए लगाए गए स्मार्ट अलर्ट सिस्टम अगर पूरी तरह इंटरनेट या वाई-फाई पर निर्भर हैं तो नेटवर्क फेल होने पर उनकी उपयोगिता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में स्थानीय अलर्ट या वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था रखना बेहतर है।
जैसलमेर की घटना ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट में जैसलमेर की एक घटना का उल्लेख भी किया गया है। गेट का ऑटोमेटिक लॉक खुल नहीं पाने के कारण 20 लोगों की जान चली गई थी। बताया गया कि अचानक आई स्थिति में लोगों ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन ऑटोमेटिक सिस्टम के कारण रास्ता नहीं खुल सका।
यह घटना इस बात की ओर गंभीर संकेत करती है कि किसी भी सुरक्षा व्यवस्था में सुविधा के साथ-साथ इमरजेंसी एग्जिट और मैनुअल ओवरराइड की व्यवस्था होना कितना जरूरी है।
स्मार्ट सिस्टम फेल होने से सामने आए कई मामले
रिपोर्ट में अलग-अलग स्थानों पर स्मार्ट और इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम की विफलता से जुड़े मामलों का भी जिक्र है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक लॉक का काम बंद करना, स्मार्ट दरवाजे का जाम होना और ऑटोमेटिक सिस्टम के कारण लोगों के फंसने जैसी परिस्थितियां शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्मार्ट डिवाइस को 100 प्रतिशत भरोसेमंद मानना सही नहीं है। तकनीक में सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, बिजली, नेटवर्क और बैटरी—कई स्तरों पर निर्भरता होती है। इनमें से किसी एक में भी समस्या आने पर पूरा सिस्टम प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञ की सलाह: स्मार्ट के साथ रखें मैनुअल बैकअप
साइबर और डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक घर या वाहन में लगाए गए स्मार्ट उपकरणों के साथ उनका फिजिकल या मैनुअल बैकअप हमेशा उपलब्ध रहना चाहिए।
स्मार्ट लॉक के साथ पारंपरिक चाबी रखें।
बिजली जाने पर काम करने वाला बैकअप विकल्प रखें।
गेट में मैनुअल ओवरराइड की सुविधा जांचें।
ऐप पर निर्भर सिस्टम में वैकल्पिक एक्सेस का तरीका जानें।
बुजुर्गों के लिए केवल वाई-फाई आधारित इमरजेंसी सिस्टम पर निर्भर न रहें।
परिवार के सदस्यों को इमरजेंसी में लॉक खोलने की प्रक्रिया पहले से बताएं।
बड़ा सवाल: सुविधा के लिए बनी तकनीक कहीं संकट में बाधा तो नहीं बनेगी?
स्मार्ट तकनीक निश्चित रूप से सुविधा और सुरक्षा बढ़ाती है, लेकिन सुरक्षा का मतलब केवल डिजिटल सिस्टम लगाना नहीं, बल्कि उसके फेल होने की स्थिति के लिए तैयार रहना भी है। इसलिए घर, कार्यालय, वाहन या किसी सार्वजनिक स्थान पर स्मार्ट लॉक और ऑटोमेशन लगाते समय यह जरूर सुनिश्चित करें कि बिजली, इंटरनेट, बैटरी या सिस्टम फेल होने पर लोगों के पास बाहर निकलने या अंदर प्रवेश करने का सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता मौजूद हो।