जिंदगी की ढलती शाम में टूट रहे रिश्ते, साथ छोड़ रहे हमसफर

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राजस्थान की अदालतों में 8,750 से ज्यादा वैवाहिक मामले लंबित, उम्रदराज दंपतियों के बीच बढ़ रहा अलगाव; जयपुर में 50+ उम्र वाले दंपतियों के मामले चिंता का विषय

जयपुर। Rkhabar
शादी को जीवनभर का साथ माना जाता है, लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश में अब वैवाहिक रिश्तों में दरार उम्र की किसी सीमा को नहीं मान रही। युवा दंपतियों के बीच विवाद और तलाक के मामले तो सामने आते ही हैं, लेकिन अब 50 साल से अधिक उम्र के पति-पत्नी भी लंबे वैवाहिक जीवन के बाद अलग होने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं। राजस्थान की अदालतों में लंबित वैवाहिक विवादों की संख्या और उनमें उम्रदराज दंपतियों की मौजूदगी बदलते पारिवारिक ढांचे की गंभीर तस्वीर पेश करती है।

पत्रिका की विशेष रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान की अदालतों में 8,750 से अधिक वैवाहिक मामले लंबित हैं। इनमें करीब 20 प्रतिशत मामले ऐसे दंपतियों के हैं, जिनमें उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है। यानी कई मामलों में पति-पत्नी ने साथ रहते हुए जिंदगी के कई दशक गुजार दिए, बच्चे बड़े होकर अपने जीवन में स्थापित हो गए, लेकिन उम्र के अंतिम पड़ाव में दोनों के बीच रिश्ते को लेकर ऐसी दूरी पैदा हो गई कि मामला अदालत तक पहुंच गया।

77 और 76 साल की उम्र में मांगा अलगाव

अजमेर रोड क्षेत्र से सामने आया एक मामला इस बदलती पारिवारिक तस्वीर को बेहद स्पष्ट करता है। यहां 77 वर्षीय पति और 76 वर्षीय पत्नी ने अलग होने की इच्छा जताई। दोनों के दो बच्चे हैं, जो अपने-अपने जीवन में स्थापित हैं और घर में पोते-पोतियां भी हैं।

करीब 50 वर्ष से अधिक लंबे वैवाहिक जीवन के बाद भी दोनों के बीच रिश्तों में ऐसी दूरी पैदा हुई कि उन्होंने पारिवारिक न्यायालय का रुख किया। रिपोर्ट के अनुसार दंपती का कहना है कि वे लंबे समय से अलग-अलग तरीके से जीवन जी रहे हैं और अब रिश्ते को औपचारिक रूप से समाप्त करना चाहते हैं।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आमतौर पर माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ पति-पत्नी के बीच मतभेद कम होते हैं और परिवार एक-दूसरे का सहारा बनता है। लेकिन इस मामले ने इस धारणा पर भी सवाल खड़े किए हैं।

30 साल से अलग, अब अदालत में पहुंचा मामला

एक अन्य मामले में 69 वर्षीय पति और 65 वर्षीय पत्नी के बीच करीब तीन दशक से विवाद चल रहा है। दंपती के तीन बच्चे हैं। बताया गया कि पति-पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे हैं और अब पति ने पारिवारिक न्यायालय में याचिका दायर कर तलाक की मांग की है।

याचिका में पति की ओर से मानसिक क्रूरता को आधार बनाया गया है। तीन दशक तक चले अलगाव के बाद मामला अदालत तक पहुंचना बताता है कि कई बार पति-पत्नी के बीच विवाद समय के साथ खत्म होने के बजाय और गहरा होता चला जाता है।

पहले सामाजिक दबाव रिश्ते बचाता था

रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से बदलते सामाजिक नजरिए की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। पहले परिवार और समाज का दबाव पति-पत्नी को आपसी मतभेदों के बावजूद साथ रहने के लिए मजबूर करता था। व्यक्तिगत असहमति, इच्छाओं और दुखों को कई बार दबाकर पूरा जीवन गुजार दिया जाता था।

कहा जाता था कि “डोली मायके से उठती है और अर्थी ससुराल से।” ऐसे सामाजिक विचारों के कारण दंपती अपने रिश्ते को हर परिस्थिति में निभाने की कोशिश करते थे। पति-पत्नी के बीच नाबालिग बच्चे हों तो वे भी परिवार को जोड़े रखने वाली कड़ी बन जाते थे।

लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदली हैं। शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता, कानूनी अधिकारों की जानकारी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता ने लोगों को अपने जीवन से जुड़े फैसले खुद लेने की क्षमता दी है।

बच्चों के बड़े होने के बाद सामने आ रहे पुराने मतभेद

विशेषज्ञों के मुताबिक कई मामलों में पति-पत्नी वर्षों तक बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण अपने मतभेदों को दबाकर साथ रहते हैं। बच्चों की पढ़ाई, करियर और शादी जैसी जिम्मेदारियां पूरी होने के बाद जब परिवार की प्राथमिकताएं बदलती हैं तो पुराने विवाद फिर सामने आने लगते हैं।

ऐसे में पति-पत्नी को महसूस होता है कि उनके बीच भावनात्मक जुड़ाव काफी पहले खत्म हो चुका है। कई लोग इसे ‘एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम’ से भी जोड़ते हैं—जब बच्चे बड़े होकर घर से अलग हो जाते हैं और पति-पत्नी के सामने एक-दूसरे के साथ रहने का वही पुराना रिश्ता रह जाता है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता ने बदली सोच

50 वर्ष की उम्र पार कर चुकी कई महिलाएं अब आर्थिक रूप से पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर हैं। उन्हें अपने कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विकल्पों की भी जानकारी है। ऐसे में यदि वैवाहिक जीवन में लगातार तनाव, मानसिक प्रताड़ना या सम्मान की कमी महसूस होती है तो वे अलग जीवन जीने का निर्णय लेने में पहले की तुलना में अधिक सक्षम हैं।

यही वजह है कि उम्रदराज दंपतियों के तलाक या वैवाहिक विवाद अब केवल व्यक्तिगत घटनाएं नहीं रह गए हैं, बल्कि बदलते सामाजिक और पारिवारिक ढांचे का संकेत भी माने जा रहे हैं।

बदलते रिश्तों की बड़ी तस्वीर

उम्रदराज दंपतियों के वैवाहिक विवादों को केवल तलाक के बढ़ते आंकड़ों के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे वर्षों से जमा मतभेद, बदलती पारिवारिक संरचना, आर्थिक स्वतंत्रता, बच्चों का अलग हो जाना और व्यक्तिगत सम्मान जैसी कई वजहें हो सकती हैं।

जिंदगी की ढलती शाम में जब साथ निभाने की जरूरत सबसे ज्यादा होती है, उसी समय हमसफर का अलग होने का फैसला कई सवाल खड़े करता है। राजस्थान की अदालतों में लंबित हजारों वैवाहिक मामले इस बात का संकेत हैं कि परिवार और वैवाहिक रिश्तों की पारंपरिक परिभाषा तेजी से बदल रही है।

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