NEET Paper Leak मामले में बड़ा खुलासा, दिवाली पर ही तय हो गया था पेपर लीक का ‘खेल’, पढ़े खबर

post 201 (1)

NEET Paper Leak 2026: NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पेपर लीक की साजिश महीनों पहले ही रची जा चुकी थी। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपियों को दीपावली के आसपास ही संकेत दे दिए गए थे कि इस बार नीट का पेपर उपलब्ध करा दिया जाएगा।

CBI ने कार्रवाई तेज करते हुए जयपुर से चार प्रमुख आरोपियों—मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, हरियाणा निवासी यश यादव और विकास (मांगीलाल का पुत्र)—को गिरफ्तार किया है। बुधवार को सभी आरोपियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया और आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाया गया।

सीकर बना नेटवर्क का केंद्र:-

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस पूरे गिरोह का संचालन सीकर से हो रहा था। यश यादव और विकास सीकर के एक ही कोचिंग संस्थान में पढ़ते थे, जहां से इनके बीच संपर्क स्थापित हुआ और नेटवर्क धीरे-धीरे फैलता गया।

परिवार के सदस्य भी जांच के दायरे में:-

CBI की जांच अब आरोपियों के परिजनों तक भी पहुंच गई है। एजेंसी उन रिश्तेदारों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है, जिन्होंने हाल ही में NEET परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसमें दिनेश बिवाल की भतीजियां सोनिया और पलक, तथा मांगीलाल की बेटी प्रकृति शामिल हैं। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि कहीं इनका चयन भी पेपर लीक से जुड़ा तो नहीं है।

पेपर सप्लाई की चेन आई सामने:-

जांच एजेंसियों के अनुसार, पेपर सबसे पहले महाराष्ट्र के अहिल्याबाई नगर निवासी धनंजय तक पहुंचा। इसके बाद यह नासिक के शुभम खैरनार, फिर हरियाणा के यश यादव और अंत में राजस्थान में उसके संपर्कों—मांगीलाल और दिनेश—तक पहुंचाया गया।

कुछ आरोपी फरार, तलाश जारी:-

मामले में दिनेश बिवाल का बेटा ऋषि अभी फरार बताया जा रहा है। इसके अलावा सीकर के राकेश मंडवरिया और जयपुर के एक अन्य आरोपी से भी पूछताछ जारी है।

आगे क्या?

CBI की टीम ने सीकर में डेरा डालकर नेटवर्क से जुड़े लोगों की पड़ताल शुरू कर दी है। SOG द्वारा चिन्हित छात्रों और अभिभावकों में से कुछ से पूछताछ के बाद उन्हें फिलहाल शहर न छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।

माना जा रहा है कि दिल्ली में होने वाली पूछताछ के दौरान इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।