राजस्थान के किसानों को बड़ी राहत, 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि

राजस्थान समेत देशभर के किसानों के लिए बुधवार का दिन बड़ी राहत और उम्मीद लेकर आया। केंद्र की भारत सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए इस फैसले का सबसे बड़ा असर राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा, जहां बाजरा, कपास और तिलहन की खेती बड़े स्तर पर होती है।
किन फसलों पर कितना बढ़ा MSP?
इस बार सरकार ने किसानों को लागत का कम से कम 1.5 गुना मूल्य दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रमुख फसलों में बढ़ोतरी इस प्रकार है—
- सूरजमुखी के बीज: ₹622 प्रति क्विंटल की सबसे अधिक वृद्धि
- कपास (Cotton): ₹557 प्रति क्विंटल का इजाफा
- नाइजरसीड: ₹515 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
- तिल (Sesamum): ₹500 प्रति क्विंटल की वृद्धि
“किसानों की मेहनत को मिला सम्मान”
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में अहम है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि सूरजमुखी, कपास और तिलहन जैसी फसलों के दाम बढ़ने से किसानों की आय में सुधार होगा और उनकी मेहनत को सही मायने में सम्मान मिलेगा।
राजस्थान के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
राजस्थान कृषि प्रधान राज्यों में शामिल है, जहां खरीफ फसलों का उत्पादन बड़ी मात्रा में होता है।
- कपास बेल्ट को फायदा: हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और भीलवाड़ा जैसे जिलों के किसानों को कपास के MSP में बढ़ोतरी से सीधा लाभ मिलेगा।
- तिलहन और सूरजमुखी उत्पादक क्षेत्र: शेखावाटी और पूर्वी राजस्थान में इस फैसले से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है।
- ग्रामीण बाजारों में तेजी: किसानों के पास अतिरिक्त आय आने से गांवों में खरीदारी और आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा।
MSP बढ़ोतरी के पीछे सरकार की रणनीति:-
सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर लाभकारी मूल्य दिलाने के उद्देश्य से लिया गया है। लक्ष्य यह है कि किसानों को कम से कम 50% तक का मुनाफा सुनिश्चित हो। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि वे आधुनिक खेती, बेहतर बीज और नई तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित होंगे।