Rajasthan: 83 लाख के लालच में सनसनीखेज वारदात, शव को बिजली से झुलसाया, 4 आरोपी गिरफ्तार

Rajasthan: भीलवाड़ा,जिले में बीमा क्लेम के लिए कथित साजिश से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक युवक की मौत के बाद उसे करंट लगने की दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया गया। पुलिस के अनुसार यह मामला बीमा राशि प्राप्त करने के उद्देश्य से किए गए कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा हो सकता है। फिलहाल चार संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
गांधीनगर थाना प्रभारी पुष्पा कासोटिया के मुताबिक 7 मई की रात मांडल थाना क्षेत्र से एक संदिग्ध शव अस्पताल लाए जाने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस को वहां अहमदाबाद जिले के नरोदा गांव निवासी चंपाबेन मिलीं, जिन्होंने मृतक की पहचान अपने 36 वर्षीय पुत्र दीपक के रूप में की।
महिला के अनुसार कुछ लोग दीपक का इलाज कराने के बहाने उन्हें राजस्थान लेकर आए थे। रास्ते में भीलवाड़ा के मालोला गांव में एक व्यक्ति के घर रुकने के दौरान देर रात दीपक की मौत हो गई। आरोप है कि इसके बाद साथ आए लोगों ने घटना को दुर्घटना के रूप में प्रस्तुत करने की योजना बनाई।
पुलिस जांच में सामने आया कि शव के हाथ-पैर की अंगुलियों को जलाकर करंट लगने जैसी स्थिति बनाने का प्रयास किया गया। बाद में अस्पताल में इसे खेत में काम करते समय करंट लगने का मामला बताया गया। हालांकि मांडल अस्पताल के चिकित्सक को शव पर मिले निशान संदिग्ध लगे। शरीर पर पाए गए घाव सामान्य करंट हादसे से मेल नहीं खाते थे, वहीं सीने पर ईसीजी इलेक्ट्रोड के निशान भी पाए गए, जिसके बाद पुलिस को सूचित किया गया।
पुलिस के अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृतक के साथ आए लोग मौके से फरार हो गए। मृतक के 14 वर्षीय पुत्र ने पुलिस को विशाल, सूरज, अर्जुन और भरत नामक व्यक्तियों की जानकारी दी। मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने गंगरार टोल नाके से चारों संदिग्धों को हिरासत में लिया और वाहन भी जब्त किया।
मृतक के पुत्र ने आरोप लगाया कि उसके पिता को पहले अहमदाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी हालत गंभीर बताई गई थी। इसके बाद परिवार को कथित रूप से यह सलाह दी गई कि मृत्यु को बीमारी के बजाय करंट हादसा बताया जाए। उसने यह भी आरोप लगाया कि शव से खून निकालने और शरीर को जलाने की कोशिश की गई थी।
प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी कथित रूप से आर्थिक रूप से कमजोर या गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को निशाना बनाते थे और उनके नाम पर उच्च राशि के बीमा पॉलिसी करवाते थे। पुलिस के अनुसार मृतक के नाम पर लगभग 83 लाख रुपए के बीमा कराए गए थे।
भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव ने बताया कि मामले में बीमा दस्तावेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विस्तृत जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिजन शव को गुजरात ले जाने में असमर्थ थे, जिसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिसकर्मियों की सहायता से शव को भेजने की व्यवस्था की गई।