Rajasthan Politics: ‘लोकसभा भंग करें…’, PM मोदी के माफीनामे पर अशोक गहलोत का बड़ा हमला

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Rajasthan Politics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद देशभर में, खासकर राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शनिवार रात पीएम द्वारा विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाने और देश की महिलाओं से माफी मांगने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कड़ा पलटवार किया। जयपुर में मीडिया से बातचीत में गहलोत ने पीएम के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें सीधे चुनावी चुनौती दी।

‘लोकसभा भंग करें और चुनाव कराएं’:-

प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि अगर उन्हें अपने दावे पर भरोसा है तो लोकसभा भंग कर तुरंत चुनाव कराए जाएं। उन्होंने कहा कि देश की जनता और महिला शक्ति खुद तय कर देगी कि वह किसके साथ खड़ी है।

ओबीसी महिलाओं के मुद्दे पर सवाल:-

गहलोत ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने से ओबीसी महिलाओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि 2026 की जातिगत जनगणना के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा लाए गए प्रावधानों में ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी।

चुनाव आयोग पर भी निशाना:-

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चल रहे चुनावों के बीच पीएम के संबोधन को गहलोत ने आचार संहिता का उल्लंघन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष भूमिका नहीं निभा रहा और राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है।

पीएम का पक्ष:-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देश की महिलाओं से माफी मांगी कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ संसद में पारित नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि यह बिल किसी के अधिकार छीनने के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं के लंबित हक को सुनिश्चित करने के लिए था, जिसका लाभ 2029 के चुनावों में मिलना तय था। इससे पहले पीएम कृषि कानूनों की वापसी पर भी देश से माफी मांग चुके हैं।

राजस्थान में सियासी असर:-

राजस्थान में महिला वोट बैंक को अहम माना जाता है। ऐसे में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। एक ओर कांग्रेस अब इस मुद्दे को ओबीसी और महिला अधिकारों से जोड़कर उठाने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की राजनीति करार दे रही है।

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