Rajasthan: पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 28 लाख की साइबर ठगी मामले में बैंक कर्मचारी समेत दो गिरफ्तार

जोधपुर। साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जोधपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए निवेश के नाम पर करीब 28 लाख रुपए की ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। साइबर थाना पुलिस ने मामले में एक बैंक कर्मचारी समेत दो आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए फर्जी निवेश योजना का झांसा देकर पीड़ित से लाखों रुपए ठग लिए थे।
पुलिस के अनुसार अतुल भूतड़ा ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि फेसबुक पर दिखाई दिए एक निवेश संबंधी विज्ञापन के माध्यम से उसकी ठगों से पहचान हुई। लिंक पर क्लिक करने के बाद टेलीग्राम के जरिए संपर्क करने वाले व्यक्ति ने खुद को निवेश कंपनी का प्रतिनिधि बताया और कम समय में अधिक मुनाफे का लालच दिया। भरोसा दिलाने के बाद पीड़ित से अलग-अलग किश्तों में 27.97 लाख रुपए निवेश करवा लिए गए। बाद में जब उसने राशि निकालने का प्रयास किया तो आरोपी टालमटोल करने लगे। इसके बाद पीड़ित ने साइबर थाने में मामला दर्ज कराया।
जांच के दौरान पुलिस टीम दिल्ली पहुंची और निखिल शर्मा निवासी शिवराम पार्क, निहाल विहार तथा जयवीर सिंह निवासी निहाल विहार को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि जयवीर एक स्मॉल फाइनेंस बैंक में अकाउंट मैनेजर के पद पर कार्यरत था। आरोप है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक खाते खुलवाए और ठगी की रकम इन खातों में जमा करवाई।
पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी विदेशी नंबरों से संचालित साइबर ठगों के संपर्क में थे। खातों में रकम आने के बाद उसे चेक और अन्य माध्यमों से निकालकर आगे भेजा जाता था। पूछताछ में साइबर ठगी के अन्य मामलों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी निवेश योजनाओं के विज्ञापन चलाकर लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देते थे। निवेश के नाम पर रकम जमा करवाने के बाद संपर्क तोड़ दिया जाता था।
गौरतलब है कि इससे पहले जोधपुर से जुड़ी एक साइबर जांच में अंतरराष्ट्रीय ठगी नेटवर्क का भी खुलासा हुआ था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में पता चला था कि भारत में फर्जी तरीके से सक्रिय किए गए करीब 36 हजार सिम कार्ड कंबोडिया में संचालित किए जा रहे थे। इनमें से 5300 से अधिक सिम कार्ड देशभर में साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल हुए थे, जिनके जरिए करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।