पुलिस के डर से दुबई में ही बस गया लुत्फी, राजस्थान की युवतियों को जाल में फंसाकर बनाई गैंग, अब प्रत्यर्पण की तैयारी

पुलिस के डर से दुबई में ही बस गया लुत्फी, राजस्थान की युवतियों को जाल में फंसाकर बनाई गैंग, अब प्रत्यर्पण की तैयारी
भीलवाड़ा। Rkhabar
राजस्थान के बहुचर्चित अपराधियों में शामिल पूर्व पार्षद फजले रऊफ उर्फ लुत्फी को लेकर एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। भीलवाड़ा पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि वर्ष 2022 में आदर्श तापड़िया हत्याकांड से अपना नाम जुड़ने की आशंका के बाद दुबई भागा लुत्फी वहीं बैठकर रंगदारी, हवाला, अपहरण और संगठित अपराध का बड़ा नेटवर्क संचालित करने लगा था। अब पुलिस उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के साथ-साथ उसे भारत लाकर कानून के कटघरे में खड़ा करने की तैयारी में जुट गई है।
आदर्श तापड़िया हत्याकांड के बाद छोड़ा भारत
पुलिस सूत्रों के अनुसार वर्ष 2022 में बहुचर्चित आदर्श तापड़िया हत्याकांड के बाद लुत्फी को आशंका थी कि जांच की आंच उस तक पहुंच सकती है। इसी डर से वह भीलवाड़ा छोड़कर दुबई चला गया।
कुछ समय बाद जब मामला शांत होता दिखाई दिया तो उसने भारत लौटने की कोशिश की, लेकिन तत्कालीन पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव द्वारा ऑनलाइन सट्टा, हवाला और अन्य संगीन मामलों में सख्ती शुरू होने के बाद वह दोबारा अपने सहयोगियों के साथ दुबई भाग गया।
दुबई में बनाया अपराध का नया अड्डा
भीलवाड़ा की सुभाषनगर थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए योगेश मूंदड़ा, वसीम और मोइन खान से पूछताछ में सामने आया कि दुबई पहुंचने के बाद लुत्फी ने वहां अपना अपराधी नेटवर्क खड़ा कर लिया था।
जांच में सामने आया कि उसका गिरोह रंगदारी वसूली, हवाला कारोबार, अपहरण और अन्य आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय था। पुलिस का दावा है कि दुबई में रहने वाले एनआरआई लोगों को निशाना बनाकर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।
राजस्थान की युवतियों को बनाया गैंग का हिस्सा
पूछताछ में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि लुत्फी ने राजस्थान और विशेष रूप से भीलवाड़ा की युवतियों को अपने संपर्क में लेकर उन्हें दुबई बुलाने की योजना बनाई।
पुलिस के अनुसार—
- पांच युवतियों को पहले ही दुबई बुलाया जा चुका था।
- इनमें दो युवतियां भीलवाड़ा की बताई जा रही हैं।
- चार अन्य युवतियों के पासपोर्ट बनवाकर उन्हें भी दुबई ले जाने की तैयारी चल रही थी।
- जांच एजेंसियों का मानना है कि इन युवतियों का इस्तेमाल एनआरआई लोगों को जाल में फंसाने और फिर रंगदारी वसूलने के लिए किया जाता था।
पुलिस इन दावों की विस्तृत जांच कर रही है और प्रत्येक पहलू की पुष्टि के लिए दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
दुबई पुलिस की कार्रवाई से बिखर गया गैंग
बताया जा रहा है कि लुत्फी की लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियों से परेशान होकर दुबई पुलिस ने जुलाई के पहले सप्ताह में उसके खिलाफ कार्रवाई की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
लुत्फी की गिरफ्तारी के बाद उसके साथ काम कर रहे गुर्गों में हड़कंप मच गया। योगेश मूंदड़ा, वसीम, मोइन खान और राजा जैसे सहयोगी गिरफ्तारी के डर से भारत लौट आए।
हालांकि भीलवाड़ा की सुभाषनगर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए योगेश, वसीम और मोइन खान को गिरफ्तार कर लिया, जबकि राजा की तलाश जारी है।
88 लाख की रंगदारी का भी खुलासा
पूछताछ में सामने आया कि भीलवाड़ा के कारोबारी मुकेश टेलर से कथित रूप से 88 लाख रुपये की रंगदारी वसूली गई थी।
बताया जा रहा है कि कारोबारी लुत्फी गैंग के दबाव और धमकियों से परेशान होकर दुबई छोड़कर वापस भीलवाड़ा लौट आए थे। पुलिस इस मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और अन्य सबूतों की भी जांच कर रही है।
बेनामी संपत्तियों की जांच शुरू
भीलवाड़ा पुलिस अब लुत्फी द्वारा अपराध के जरिए अर्जित संपत्तियों की जानकारी जुटाने में लगी हुई है।
जांच के मुख्य बिंदु—
- बेनामी संपत्तियों की पहचान
- हवाला के जरिए हुए लेन-देन की जांच
- आर्थिक मदद करने वालों की पहचान
- स्थानीय सहयोगियों की कॉल डिटेल और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच
- पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि भीलवाड़ा और राजस्थान में किन लोगों ने उसे आर्थिक या अन्य प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई।
प्रत्यर्पण की तैयारी में पुलिस
भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक सागर राणा के निर्देशन में अब अगला बड़ा कदम लुत्फी को भारत लाना बताया जा रहा है।
पुलिस भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच लागू प्रत्यर्पण संधि के तहत कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है, ताकि उसे भारतीय अदालत में पेश कर उसके खिलाफ दर्ज मामलों में मुकदमा चलाया जा सके।
जांच अभी जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच में रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क, आर्थिक स्रोतों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की गहन पड़ताल कर रही है।
नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित कई तथ्य पुलिस जांच और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आए दावों पर आधारित हैं। अंतिम सत्यता का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही होगा।