बड़े तस्कर जेल गए तो 22 वर्षीय युवक ने संभाल ली एमडी की सप्लाई, मां से मंगवाता था खेप; ऑपरेशन नीलकंठ में बड़ा खुलासा

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बड़े तस्कर जेल गए तो 22 वर्षीय युवक ने संभाल ली एमडी की सप्लाई, मां से मंगवाता था खेप; ऑपरेशन नीलकंठ में बड़ा खुलासा

बीकानेर। Rkhabar

राजस्थान के बीकानेर जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन नीलकंठ’ के तहत सदर थाना पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने 22 वर्षीय करीम बख्श उर्फ छोटू को 8.61 ग्राम एमडी (MDMA) के साथ गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिले के बड़े तस्करों के जेल जाने के बाद आरोपी ने नशे के कारोबार में खाली हुई जगह का फायदा उठाकर अपना नया नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश शुरू कर दी थी।

पुलिस का कहना है कि आरोपी पिछले करीब छह महीने से एमडी तस्करी में सक्रिय था और गांवों तक नशे की सप्लाई पहुंचाकर नए ग्राहक तैयार कर रहा था। अब पुलिस उसके पूरे नेटवर्क, सप्लाई चेन और उससे जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

मुख्य तस्करों की गिरफ्तारी के बाद शुरू किया कारोबार

सदर थानाधिकारी सुरेंद्र पचार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी करीम बख्श उर्फ छोटू, निवासी फत्तीपुरा (भुट्टों का बास), ने पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने स्वीकार किया कि वह मेहंदी हसन की मां से एमडी की खेप लेकर आता था। जब जिले के प्रमुख तस्कर पुलिस कार्रवाई में जेल चले गए, तब उसने खुद का अलग नेटवर्क तैयार करना शुरू कर दिया।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लगातार नए युवाओं को नशे का आदी बनाकर अपना ग्राहक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।

गांवों तक पहुंचा रहा था एमडी की सप्लाई

जांच में सामने आया है कि आरोपी केवल शहर तक सीमित नहीं था।

पुलिस के अनुसार वह जामसर थाना क्षेत्र के भैरूंखेड़ा गांव सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में युवाओं को एमडी सप्लाई करता था।

पूछताछ में आरोपी ने पांच से सात अन्य लोगों के नाम भी बताए हैं। पुलिस अब इन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि वे ग्राहक थे या नेटवर्क का हिस्सा।

पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है।

जांच के प्रमुख बिंदु—

  • एमडी की खेप कहां से आती थी।
  • किन-किन लोगों तक सप्लाई की जाती थी।
  • नेटवर्क में शामिल अन्य तस्करों की पहचान।
  • आर्थिक लेन-देन और भुगतान का तरीका।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के फैलते नेटवर्क की जांच।

पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

ऑपरेशन नीलकंठ में दो और तस्कर गिरफ्तार

इसी अभियान के तहत पुलिस ने नागौर, बीकानेर और जोधपुर तक फैले एमडीएमए तस्करी नेटवर्क पर भी बड़ी कार्रवाई की है।

सदर थाना पुलिस ने नागौर निवासी मोहम्मद अली और महिपाल राइका को जोधपुर से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

पुलिस अब उनसे पूरे गिरोह, सप्लाई नेटवर्क और अन्य तस्करों के बारे में पूछताछ कर रही है।

नागौर से बीकानेर तक फैली थी सप्लाई चेन

जांच में सामने आया कि आरोपी—

  • नागौर और जोधपुर से एमडीएमए लेकर आते थे।
  • यह खेप असलम उर्फ इस्लामुद्दीन को सौंपी जाती थी।
  • असलम मादक पदार्थ लेकर बीकानेर पहुंचता था।
  • यहां वह खेप ताराचंद सारस्वत को सौंपकर भुगतान लेकर लौट जाता था।
  • इसके बाद ताराचंद बीकानेर शहर और आसपास के क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर एमडी की सप्लाई करता था।

इस मामले में पुलिस पहले ही भीनासर निवासी ताराचंद सारस्वत और नागौर निवासी असलम उर्फ इस्लामुद्दीन को गिरफ्तार कर चुकी है।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई

यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के निर्देशन में की गई।

अभियान की निगरानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) चक्रवर्ती सिंह राठौड़ और कार्यवाहक सीओ सदर शालिनी बजाज ने की, जबकि कार्रवाई का नेतृत्व सदर थानाधिकारी सुरेंद्र पचार ने किया।

ग्रामीण इलाकों में बढ़ता नशे का कारोबार चिंता का विषय

पुलिस का मानना है कि एमडी जैसे सिंथेटिक ड्रग्स का शहरों से निकलकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए ऑपरेशन नीलकंठ के तहत लगातार कार्रवाई कर नशा तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

एक नजर में पूरा मामला

  • गिरफ्तार आरोपी: करीम बख्श उर्फ छोटू (22 वर्ष)
  • बरामदगी: 8.61 ग्राम एमडी (MDMA)
  • तरीका: मुख्य तस्करों के जेल जाने के बाद नया नेटवर्क तैयार करना
  • सप्लाई क्षेत्र: बीकानेर शहर और जामसर क्षेत्र के गांव
  • अन्य कार्रवाई: नागौर और जोधपुर से जुड़े दो और आरोपी गिरफ्तार
  • जांच: पूरे सप्लाई नेटवर्क और अन्य तस्करों की तलाश जारी

नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित कई तथ्य पुलिस की प्रारंभिक जांच और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आए दावों पर आधारित हैं। मामले की अंतिम पुष्टि आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।

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