राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र: दो दिन की रणनीति पर सियासी घमासान, विपक्ष ने 15-20 दिन चलाने की मांग उठाई

राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र: दो दिन की रणनीति पर सियासी घमासान, विपक्ष ने 15-20 दिन चलाने की मांग उठाई
जयपुर। Rkhabar
पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव से ठीक पहले 20 अगस्त से शुरू होने जा रहे राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सरकार की ओर से सत्र की शुरुआती बैठकें सीमित अवधि के लिए आयोजित कर उसे स्थगित करने की रणनीति पर मंथन चल रहा है। वहीं विपक्ष ने सरकार की इस संभावित रणनीति पर सवाल उठाते हुए विधानसभा का सत्र कम से कम 15 से 20 दिन चलाने की मांग की है।
सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि 20 अगस्त से विधानसभा की बैठकें शुरू होंगी और आवश्यक कार्यवाही के बाद सत्र को स्थगित किया जा सकता है। पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवंबर में विधानसभा की बैठकें दोबारा बुलाए जाने की संभावना है। ऐसे में करीब साढ़े पांच महीने के अंतराल के बाद शुरू होने वाला विधानसभा सत्र शुरुआती चरण में महज दो दिन तक सीमित रहने की संभावना ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है।
चुनाव से पहले सदन में विपक्ष के मुद्दों पर सीमित होगी चर्चा?
राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। सरकार की ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की थीम के तहत चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। माना जा रहा है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो सकती है।
ऐसे में सरकार के सामने चुनावी प्रक्रिया के दौरान नई घोषणाओं और नीतिगत फैसलों को लेकर सीमाएं रहेंगी। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, विधानसभा को शुरुआती बैठकों के बाद स्थगित करना और चुनाव के बाद फिर से बैठक बुलाना सरकार के लिए व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
हालांकि, विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही से बचने की रणनीति के रूप में देख रहा है। यदि विधानसभा की बैठकें केवल दो दिन चलती हैं तो विपक्ष के पास प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों को सदन में विस्तार से उठाने के लिए समय काफी कम रहेगा।
ट्री एक्ट और यूसीसी समेत कई विधेयकों की तैयारी
मानसून सत्र के दौरान सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में लाने की तैयारी की जा रही है। इनमें ट्री एक्ट और समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा सरकार अन्य विधायी कार्य भी सदन के सामने रख सकती है। ऐसे में महज दो दिन की बैठक में विधेयकों पर चर्चा, बहस और उन्हें पारित कराने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि महत्वपूर्ण कानूनों को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय सदस्यों को पर्याप्त चर्चा का अवसर मिलना चाहिए।
18 अगस्त को होगी सर्वदलीय बैठक
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मानसून सत्र को लेकर 18 अगस्त को सुबह 11 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सत्र की कार्यवाही को लेकर सभी दलों के नेताओं से चर्चा होगी।
बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग, प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक रफीक खान सहित आरएलडी विधायक डॉ. सुभाष गर्ग, बसपा विधायक मनोज कुमार और बीएपी विधायक थावर चंद को आमंत्रित किया गया है।
सर्वदलीय बैठक के बाद यह तस्वीर और साफ हो सकती है कि विधानसभा की शुरुआती बैठकें कितने दिन चलेंगी और किन मुद्दों पर चर्चा होगी।
मुख्यमंत्री के विभागों से जुड़े सवालों के जवाब देंगे पांच मंत्री
विधानसभा के षष्ठम सत्र और इसके बाद के अंतःसत्र काल में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पास मौजूद विभागों से जुड़े विधानसभा सवालों के जवाब देने की जिम्मेदारी पांच मंत्रियों को सौंपी गई है।
इनमें उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम शामिल हैं।
इन मंत्रियों को मुख्यमंत्री के विभागों से संबंधित विधानसभा प्रश्नों के उत्तर देने के साथ अन्य संसदीय कार्यों की जिम्मेदारी भी दी गई है।
टीकाराम जूली बोले- 15 से 20 दिन चले सदन
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार की संभावित दो दिन की रणनीति पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रदेश की जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए विधानसभा को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
जूली के अनुसार सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस की ओर से सदन को 15 से 20 दिन चलाने की मांग रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के छात्र, युवा, महिलाएं, किसान, कानून व्यवस्था, बिजली-पानी, कर्मचारी, संविदाकर्मी, मजदूर, दलित, छात्रसंघ चुनाव और प्रदेश की अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा जरूरी है।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह दो-चार दिन विधानसभा की बैठकें कर सत्र को समाप्त करना चाहती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के मुद्दों के लिहाज से उचित नहीं है।
जोगाराम पटेल ने कहा- अवधि BAC तय करेगी
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि विधानसभा का सत्र 20 अगस्त से शुरू हो रहा है। सत्र कितने दिन चलेगा, इसका निर्णय कार्य सलाहकार समिति (BAC) करेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से विधानसभा सत्र चलाने को लेकर पूरी तैयारी है। सत्र की अवधि और कार्यसूची को लेकर अंतिम निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।
देवनानी बोले- चुनाव के बाद फिर बुलाई जाएगी विधानसभा
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि सत्र शुरू होने से पहले 18 अगस्त को सर्वदलीय बैठक होगी। 20 अगस्त को शोकाभिव्यक्ति के बाद कार्य सलाहकार समिति की बैठक होगी और उसके निर्णय के आधार पर सदन की कार्यसूची तय की जाएगी।
देवनानी के अनुसार विधानसभा की बैठकें अभी होंगी और इसके बाद सत्र स्थगित किया जाएगा। पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभा की बैठकें फिर बुलाई जाएंगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार कई विधेयक सदन में लेकर आ रही है।
चुनावी माहौल में विधानसभा बनेगी सियासी अखाड़ा
राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव से पहले विधानसभा का यह सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। एक ओर सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष कानून व्यवस्था, बिजली-पानी, बेरोजगारी, किसानों, कर्मचारियों, युवाओं और स्थानीय निकायों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
अब सबकी नजर 18 अगस्त की सर्वदलीय बैठक और उसके बाद कार्य सलाहकार समिति के फैसले पर रहेगी। इसी से तय होगा कि 20 अगस्त से शुरू होने वाला विधानसभा का मानसून सत्र शुरुआती चरण में कितने दिन चलेगा और चुनाव से पहले सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कितनी तीखी बहस देखने को मिलेगी।