“लू-बारिश का बहाना या चुनाव से बचने की कोशिश? हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई कड़ी फटकार”

राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव टालने के मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के रुख पर नाराजगी जताते हुए कड़ी टिप्पणी भी की।
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने की। बेंच ने साफ कहा कि सरकार को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है, इसके बावजूद देरी करना उचित नहीं है।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर सवाल:-
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक परिसीमन से जुड़े अलग-अलग फैसलों और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के कारण चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई।
इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि जब आदेश मुख्य रूप से निकायों से जुड़ा था, तो पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए? साथ ही बेंच ने यह भी कहा कि ओबीसी आयोग की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मौसम का तर्क भी नहीं चला:-
सरकार ने यह भी तर्क दिया कि राजस्थान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी है। जून में हीटवेव चलती है और जुलाई में बरसात शुरू हो जाती है। ऐसे में चुनाव कराना मुश्किल होगा। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया।
पहले ही तय थी समय-सीमा:-
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही परिसीमन की प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करने को कहा गया था।
अवमानना याचिका पर भी सुनवाई:-
निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं होने पर इस मामले में अवमानना याचिका भी दायर की गई है, जिस पर 18 मई को सुनवाई प्रस्तावित है।