Health Alert: घर के आसपास कबूतरों का जमावड़ा बन सकता है खतरनाक, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

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Health Alert: राजस्थान, शहरी इलाकों में तेजी से बढ़ती कबूतरों की संख्या अब लोगों की सेहत पर असर डालने लगी है। विशेषज्ञों के अनुसार, कबूतरों की बीट (मल) में मौजूद फंगस और सूक्ष्म कण हवा में घुलकर सांस के जरिए शरीर में पहुंचते हैं, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। वहीं, उनके पंखों से निकलने वाले महीन कण भी सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकते हैं।

सूखी खांसी के मामलों में बढ़ोतरी:-

डॉक्टरों का कहना है कि हाल के महीनों में बिना कफ वाली सूखी खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। यह खांसी धीरे-धीरे गंभीर रूप लेकर हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस (HP) में बदल सकती है। आमतौर पर इस खांसी को ठीक होने में करीब 20 दिन लगते हैं, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारी का रूप भी ले सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एचपी के 80 से 90 प्रतिशत मामलों में कबूतरों के संपर्क की भूमिका सामने आई है।

केस स्टडी से समझें खतरा:-

  • एक स्कूल शिक्षिका, जो रोजाना बच्चों की सुरक्षा के लिए कबूतरों की बीट साफ करती थीं, लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण एचपी की शिकार हो गईं।
  • वहीं, एक फ्लैट में रहने वाले परिवार को भी लगातार खांसी और सांस की समस्या बनी रही। जांच में सामने आया कि उनकी बिल्डिंग में कबूतरों की अधिक आवाजाही थी। चिकित्सकीय सलाह पर कबूतरों से दूरी बनाने और जाली लगाने के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ।

क्यों खतरनाक है कबूतरों का संपर्क:-

विशेषज्ञ बताते हैं कि कबूतरों की बीट सूखकर पाउडर बन जाती है, जो हवा में आसानी से उड़ती है। इसके कण फेफड़ों में पहुंचकर एलर्जी, संक्रमण और फाइब्रोसिस जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक संपर्क में रहने पर सांस फूलना, सीने में जकड़न और लगातार खांसी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

फैक्ट फाइल:-

  • हर महीने 500 से ज्यादा एचपी के मरीज सामने आ रहे हैं
  • लगभग 90% मामलों में कबूतरों का संपर्क मुख्य कारण
  • 20 दिन से ज्यादा खांसी रहने पर डॉक्टर से परामर्श जरूरी

विशेषज्ञ की सलाह:-

पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. सी.आर. चौधरी के अनुसार, घरों की बालकनी, छत और खिड़कियों पर कबूतरों को बैठने से रोकना चाहिए। नियमित सफाई और मास्क का उपयोग जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि आईएलडी के मामलों में एचपी सबसे आम बीमारी बनकर सामने आ रही है और अधिकतर मरीजों का कबूतरों से संपर्क पाया गया है।