बीकानेर पोक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सामूहिक दुष्कर्म के दो दोषियों को ‘आखरी सांस’ तक उम्रकैद

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बीकानेर | Rkhabar
राजस्थान के बीकानेर जिले की विशेष पोक्सो (POCSO) कोर्ट ने करीब सात साल पुराने एक नाबालिग छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस जघन्य कृत्य के दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें शेष प्राकृतिक जीवन (आखरी सांस तक) के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

विशेष न्यायालय की न्यायाधीश मनीषा चौधरी ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा: “बालिकाओं के साथ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी बरतना समाज और न्याय व्यवस्था, दोनों के ही हित में नहीं होगा। ऐसे अपराधियों के प्रति कानून को बेहद सख्त रुख अपनाना होगा।”

क्या था पूरा मामला? (घटनाक्रम)
यह मामला 22 अगस्त 2019 का है, जो बीकानेर के देशनोक थाना क्षेत्र से जुड़ा है।

अपहरण और वारदात: 16 वर्ष से कम उम्र की पीड़िता दोपहर के समय अपने पिता को टिफिन देकर घर लौट रही थी। रास्ते में आरोपी अजयदान और कालूदान ने उसका रास्ता रोका और जबरन अपहरण कर एक सुनसान मकान में ले गए।

दरिंदगी और धमकी: सुनसान मकान में मुख्य आरोपी अजयदान ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। वहीं, दूसरे आरोपी कालूदान ने इस घिनौने अपराध में अजयदान का पूरा सहयोग किया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने इस वारदात का वीडियो भी बना लिया और पीड़िता को धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया तो वे वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे।

मामला दर्ज: डरी-सहमी पीड़िता ने अगले दिन हिम्मत जुटाकर अपनी मां को आपबीती सुनाई। इसके बाद परिजनों ने देशनोक थाने में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

अदालती कार्रवाई: अकाट्य सबूतों के आगे टिकी अभियोजन की दलीलें
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष (आरोपियों के वकीलों) ने मामले को कमजोर करने के लिए पीड़िता की उम्र, मेडिकल रिपोर्ट, डीएनए (DNA) रिपोर्ट और पुलिस की जांच प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि दोनों आरोपियों को इस मामले में झूठा फंसाया गया है।

इसके जवाब में अभियोजन पक्ष (सरकारी पक्ष) ने अदालत के सामने बेहद पुख्ता सबूत पेश किए, जिनमें शामिल थे:
पीड़िता की बिना डरे दी गई अदालत में गवाही।
पीड़िता की उम्र साबित करने के लिए आधिकारिक स्कूल रिकॉर्ड।
मेडिकल रिपोर्ट और विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट।
अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य।
सभी गवाहों और सबूतों को देखने के बाद, न्यायाधीश मनीषा चौधरी ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को ‘संदेह से परे’ साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है।

दोषियों को मिली यह कड़ी सजा और आर्थिक जुर्माना
न्यायालय ने दोनों दोषियों की भूमिका के आधार पर उन्हें निम्नलिखित कठोर सजा से दंडित किया है:
अजयदान (मुख्य आरोपी): शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 1 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना।
कालूदान (सह-आरोपी): शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 75 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना।
पीड़िता को मिलेगा 5.75 लाख रुपये का प्रतिकर (मुआवजा)
न्यायालय ने पीड़िता के पुनर्वास और मानसिक संबल के लिए कुल 5.75 लाख रुपये की सहायता राशि (प्रतिकर) देने के आदेश जारी किए हैं:
कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि दोनों आरोपियों से वसूले जाने वाले जुर्माने की कुल राशि 1.75 लाख रुपये सीधे पीड़िता को दी जाए।
इसके अतिरिक्त, राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत राज्य सरकार की ओर से पीड़िता को 4 लाख रुपये की सहायता राशि अलग से प्रदान की जाएगी।

कोर्ट में इन्होंने की पैरवी

इस महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार (अभियोजन) की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक शिवचंद भोजक ने मजबूती से पक्ष रखा। वहीं, परिवादिया (पीड़िता) की ओर से अधिवक्ता रविकांत वर्मा, पंकज परिहार, मानवेंद्र सिंह और रामनिवास आचार्य ने पैरवी कर पीड़िता को न्याय दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई।

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