राजस्थान में भजनलाल सरकार ने बढ़ाया ‘ओवरटाइम’, तो MLA रविंद्र सिंह भाटी ने क्यों जताया ऐतराज?

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राजस्थान में भजनलाल सरकार ने बढ़ाया ‘ओवरटाइम’, तो MLA रविंद्र सिंह भाटी ने क्यों जताया ऐतराज?

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में ‘राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान विधेयक 2026’ पर चर्चा के दौरान मजदूरों के अधिकार, सुरक्षा और काम के घंटों को लेकर सदन में गंभीर बहस देखने को मिली। जहां एक ओर प्रशिक्षुओं की न्यूनतम आयु 12 से बढ़ाकर 14 वर्ष करने जैसे प्रावधानों को सकारात्मक कदम बताया गया, वहीं ओवरटाइम की सीमा में भारी बढ़ोतरी को लेकर कई सवाल भी उठाए गए।

ओवरटाइम की सीमा पर उठे सवाल:-

विधेयक में ओवरटाइम की अधिकतम सीमा 50 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे करने का प्रस्ताव सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।

  • निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सदन में कहा कि अन्य नियमों में मामूली बदलाव किए गए हैं, लेकिन ओवरटाइम को एकदम तीन गुना बढ़ाने के पीछे क्या तर्क है, यह स्पष्ट होना चाहिए।
  • साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अतिरिक्त काम के बदले मजदूरों को सही और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकार के पास क्या निगरानी व्यवस्था होगी।

मजदूरी भुगतान में डिजिटल व्यवस्था का सुझाव:-

  • ग्रामीण इलाकों में मजदूरों को पूरा भुगतान नहीं मिलने की शिकायतों का जिक्र करते हुए विधायक भाटी ने मजदूरी को डिजिटल माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया।
  • उनका कहना था कि यदि मजदूरी का भुगतान UPI या ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए अनिवार्य कर दिया जाए तो पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सकती है।

औद्योगिक परियोजनाओं में सुरक्षा पर चिंता

पश्चिमी राजस्थान में चल रही बड़ी परियोजनाओं और मल्टीनेशनल कंपनियों में काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई।

  • कई मामलों में दुर्घटनाओं के बाद मजदूरों को उचित सहायता नहीं मिल पाती।
  • ऐसे में कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई।

मजदूरों की गरिमा पर जोर:-

सदन में यह भी कहा गया कि मजदूर चाहे किसी भी राज्य से आया हो, सबसे पहले वह इंसान है। इसलिए सरकार को उनके अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान को लेकर समय-समय पर ठोस कदम उठाने चाहिए।

स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग:-

  • चर्चा के दौरान पश्चिमी राजस्थान में काम कर रही बड़ी कंपनियों में स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया।
  • अनस्किल्ड और शुरुआती स्तर की नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की गई।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान:-

  • दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में दैनिक कार्य समय 9 घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे किया गया।
  • साप्ताहिक कार्य अवधि 48 घंटे ही रहेगी।
  • ओवरटाइम सीमा 50 घंटे प्रति तिमाही से बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई।
  • लगातार काम के बाद विश्राम का समय 5 घंटे से बढ़ाकर 6 घंटे किया गया।

बच्चों और किशोरों से जुड़े नए नियम:-

  • प्रशिक्षुओं की न्यूनतम आयु 12 से बढ़ाकर 14 वर्ष।
  • 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराने पर प्रतिबंध।
  • किशोरों की आयु सीमा 14 से 18 वर्ष तय।
  • 14 से 18 वर्ष के किशोरों से रात में काम नहीं लिया जा सकेगा।