PM Modi Rajasthan Visit: पीएम के दौरे से ठीक पहले कांग्रेस का बड़ा आरोप, ‘एपस्टीन से भी बड़ी है उदयपुर फाइल्स’
PM Modi Rajasthan Visit: पीएम के दौरे से ठीक पहले कांग्रेस का बड़ा आरोप, ‘एपस्टीन से भी बड़ी है उदयपुर फाइल्स’
जयपुर/अजमेर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजस्थान दौरे से ठीक पहले प्रदेश की सियासत में नया घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस ने ‘उदयपुर फाइल्स’ का मुद्दा उठाकर सत्तापक्ष पर तीखा हमला बोला है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस प्रकरण को ‘एपस्टीन फाइल’ से भी बड़ा और गंभीर बताया है। जूली ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चुनौती देते हुए इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
‘दिल्ली से सीधे दखल’ का आरोप:-
जूली ने सदन में दावा किया कि उदयपुर के एक हाई-प्रोफाइल मामले में प्रदेश मुख्यालय को दरकिनार कर सीधे दिल्ली से हस्तक्षेप हुआ। उनका आरोप है कि उदयपुर के आईजी को सीधे फोन कर निर्देश दिए गए, जबकि जयपुर को इसकी जानकारी तक नहीं थी।
उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस दबाव में स्थानीय अधिकारियों की बजाय दूसरे सर्कल के डीएसपी को जांच सौंपी गई?
‘उदयपुर फाइल्स’ का सच क्या है? आरोपी और पीड़ित पर खुलासे
जूली ने दावा किया कि जिस महिला ने आरोप लगाए हैं (पीड़िता) और जिस पर आरोप हैं (आरोपी), दोनों का संबंध भारतीय जनता पार्टी से है। उन्होंने आरोप लगाया कि रात 11 बजे रिपोर्ट दर्ज होती है, 2 बजे पुलिस रेकी करती है और 3 बजे हथौड़े लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ बिना लेडीज पुलिस के किसी के घर का दरवाजा तोड़कर गिरफ्तारी की जाती है।
डिजिटल साक्ष्यों पर उठे सवाल:-
जूली ने कहा कि जब सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन जब्त किए गए थे, तो उनकी स्थिति क्या है? उन्होंने यह भी पूछा कि पुलिस की हर कार्रवाई को पोर्टल पर अपलोड करने की अनिवार्यता के बावजूद इस मामले में पारदर्शिता क्यों नहीं दिखी? क्या सरकार किसी सच को दबाना चाहती है?
‘सदन की मर्यादा है, वरना…’
कांग्रेस नेता ने कहा कि उनके पास ‘उदयपुर फाइल’ के इतने सबूत हैं, जो सामने आए तो कई प्रभावशाली चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और यदि जरूरत हो तो अपनी ही पार्टी के लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
मोदी दौरे के बीच सियासी हलचल:-
प्रधानमंत्री मोदी का अजमेर दौरा विकास परियोजनाओं को लेकर अहम माना जा रहा है, लेकिन विपक्ष के इस हमले ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। ‘उदयपुर फाइल्स’ को लेकर उठे सवालों ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सत्ता संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है।