राजस्थान में यंहा बनेगा NCR का सबसे बड़ा बायोलॉजिकल पार्क, बब्बर शेर और अफ्रीकी जिराफ बनेंगे मुख्य आकर्षण
राजस्थान में यंहा बनेगा NCR का सबसे बड़ा बायोलॉजिकल पार्क, बब्बर शेर और अफ्रीकी जिराफ बनेंगे मुख्य आकर्षण
अलवर। सरिस्का टाइगर रिजर्व के लिए देश-दुनिया में पहचान बना चुके अलवर को अब एक और बड़ी सौगात मिलने जा रही है। यहां जल्द ही बब्बर शेरों की दहाड़ और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए जिराफ नजर आएंगे। केंद्र सरकार ने कटी घाटी क्षेत्र में एनसीआर के सबसे बड़े बायोलॉजिकल पार्क की स्थापना को मंजूरी दे दी है। परियोजना के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
यह घोषणा वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने कटी घाटी स्थित नगर वन में की। वे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के दो वर्ष पूरे होने पर आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस अवसर पर “एक जिला–एक वृक्ष” योजना के तहत अलवर जिले के लिए चयनित अर्जुन प्रजाति के 730 औषधीय पौधे एक साथ लगाए गए। साथ ही अर्जुन वृक्ष से बने उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
कार्यक्रम स्थल पर सरिस्का की तर्ज पर संगमरमर से निर्मित टाइगर मॉन्यूमेंट भी स्थापित किया गया। वन राज्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित बायोलॉजिकल पार्क में शेर और जिराफ के अलावा करीब 420 प्रजातियों के पशु-पक्षी रखे जाएंगे। इससे अलवर को एक नई पहचान मिलेगी और पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
संजय शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने पांच वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। पहले वर्ष में 7 करोड़ और दूसरे वर्ष में 11 करोड़ से अधिक पौधे जनसहयोग से लगाए जा चुके हैं।
इस दौरान वन राज्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग अरावली बचाने की बात तो करते हैं, लेकिन आज तक एक भी पौधा नहीं लगाया। नगर वन में हुए प्रदर्शन के दौरान कई पौधों को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया। शर्मा स्वयं उस पहाड़ी क्षेत्र में भी पहुंचे, जहां कांग्रेस का प्रदर्शन हुआ था।
कटी घाटी के समीप स्थित प्रेम रत्नाकर बांध में हो रहे अवैध निर्माण को लेकर शर्मा ने कहा कि कोर्ट के आदेशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई होगी और उन्हीं के तहत पट्टे दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अलवर शहर की जल समस्या के समाधान के लिए कई एनिकट बनाए जा रहे हैं।
टहला क्षेत्र में जमीनों के आवंटन को लेकर वन राज्यमंत्री ने कहा कि वहां गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके चलते तत्कालीन कलेक्टर को हटाया गया था। अब यदि आवंटन रद्द होने के बाद भी जमीनों पर कब्जे की शिकायतें मिलती हैं, तो उनकी जांच कराई जाएगी।