खनन मामलों में अब एक जैसे नियम, 6 महीने में फैसले का लक्ष्य; वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई

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नई दिल्ली। Rkhabar
देश में खनन से जुड़े मामलों की सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने खनन मामलों के लिए एक समान व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके तहत देशभर में खनन से संबंधित शिकायतों की सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाएगी और मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने पर जोर रहेगा।

नई व्यवस्था के अनुसार शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके निपटारे तक की प्रक्रिया को एक समान और डिजिटल बनाने की तैयारी है। खनन मामलों की सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग राज्यों में चल रहे मामलों की निगरानी और सुनवाई की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

छह महीने में निस्तारण का लक्ष्य

प्रस्तावित व्यवस्था में खनन मामलों का निपटारा अधिकतम छह महीने में करने का लक्ष्य रखा गया है। शिकायत मिलने के बाद संबंधित पक्षों को नोटिस, जवाब, सुनवाई और अंतिम आदेश की प्रक्रिया तय समयसीमा के अनुसार पूरी करनी होगी।

केंद्र की इस पहल से राज्यों में खनन मामलों के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं के स्थान पर एक व्यापक और समान ढांचा विकसित होने की संभावना है।

ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया

नई व्यवस्था में शिकायत दर्ज करने से लेकर सुनवाई और अपील तक डिजिटल माध्यम को प्राथमिकता दी जाएगी। ऑनलाइन शिकायत, ई-नोटिस, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई, ऑनलाइन अपील और आदेशों की डिजिटल उपलब्धता जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं।

इससे लोगों को बार-बार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही मामलों की निगरानी और रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना आसान होगा।

पहले नोटिस, फिर जुर्माना

प्रस्तावित नियमों में कार्रवाई की प्रक्रिया को भी स्पष्ट करने पर जोर दिया गया है। संबंधित व्यक्ति या संस्था को पहले कारण बताओ नोटिस दिया जाएगा। जवाब और सुनवाई के बाद ही परिस्थितियों के आधार पर जुर्माने अथवा अन्य कार्रवाई का आदेश जारी किया जाएगा।

नए प्रावधानों में अलग-अलग श्रेणियों के उल्लंघन के लिए सिविल पेनल्टी का प्रावधान भी किया गया है। रिपोर्ट में बताए अनुसार रिपोर्ट समय पर उपलब्ध नहीं कराने पर प्रतिदिन 500 रुपए से लेकर 3,000 रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर उल्लंघन की स्थिति में प्रति हेक्टेयर 50 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।

गलती सुधारने का भी मिलेगा मौका

नई व्यवस्था में संबंधित व्यक्ति को अपनी गलती सुधारने का अवसर देने पर भी जोर है। यदि कोई व्यक्ति न्यूनतम जुर्माना जमा कर अपनी गलती सुधार लेता है तो कुछ मामलों में जांच से पहले ही मामला बंद किए जाने की व्यवस्था हो सकती है। हालांकि बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों को ऐसी राहत नहीं मिलने की बात सामने आई है।

अपील की समयसीमा भी तय

नई व्यवस्था में अपील प्रक्रिया को भी समयबद्ध करने का प्रस्ताव है। रिपोर्ट के अनुसार आदेश के खिलाफ 30 दिन के भीतर अपील की जा सकेगी और अपीलीय प्राधिकारी को 60 दिन में फैसला देने का लक्ष्य रखा गया है।

खनन क्षेत्र में क्या होगा असर?

नई व्यवस्था लागू होने से देशभर में खनन मामलों के लिए स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया विकसित होने की उम्मीद है। इससे अवैध या नियम विरुद्ध खनन के मामलों में कार्रवाई अधिक पारदर्शी और समयबद्ध हो सकती है। डिजिटल प्रक्रिया के कारण मामलों की निगरानी बेहतर होने के साथ-साथ मनमानी कार्रवाई की आशंका कम होने और पर्यावरण व सुरक्षा संबंधी नियमों के पालन में सुधार की संभावना भी जताई जा रही है।

इसके अलावा राजस्व संग्रह और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में भी सुधार की उम्मीद है। केंद्र की पहल का उद्देश्य खनन मामलों में एक समान नियम, स्पष्ट प्रक्रिया, डिजिटल सुनवाई और समयबद्ध निर्णय की व्यवस्था तैयार करना है।

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