राजस्थान की सियासत में युवा मतदाताओं का बढ़ता असर, 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के वोटर हैं 44 प्रतिशत

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जयपुर। Rkhabar
राजस्थान की राजनीति में आने वाले पंचायत एवं निकाय चुनावों में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। मतदाता सूचियों के विश्लेषण से सामने आए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 2.40 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। यह संख्या कुल मतदाताओं की करीब 44 प्रतिशत है। यानी राज्य में लगभग हर दूसरा मतदाता 35 वर्ष से कम उम्र का है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों में भी उल्लेखनीय अंतर दिखाई देता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की हिस्सेदारी 45.59 प्रतिशत, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 40.06 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट है कि गांवों में युवा मतदाताओं का प्रभाव शहरों की तुलना में अधिक है।

धौलपुर में सबसे मजबूत युवा वोट बैंक

जिलेवार आंकड़ों में धौलपुर ग्रामीण क्षेत्र में सबसे आगे है। यहां 18 से 35 वर्ष के मतदाताओं की हिस्सेदारी 52.44 प्रतिशत बताई गई है। इसके बाद बाड़मेर 50.63 प्रतिशत, डीग 49.57 प्रतिशत, बांसवाड़ा 49.56 प्रतिशत और जैसलमेर 49.51 प्रतिशत के साथ प्रमुख जिलों में हैं।

शहरी निकायों में भी धौलपुर 47.64 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है। इसके बाद डीग 44.81 प्रतिशत, डीडवाना-कुचामन 44.68 प्रतिशत, करौली 43.94 प्रतिशत और कोटपूतली-बहरोड़ 43.89 प्रतिशत का स्थान है।

कई जिलों में युवा मतदाताओं की हिस्सेदारी राज्य औसत से कम

इसके विपरीत कुछ जिलों में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग का अनुपात अपेक्षाकृत कम है। ग्रामीण क्षेत्र में पाली में यह 40.95 प्रतिशत, चित्तौड़गढ़ में 41.60 प्रतिशत, झुंझुनूं में 42.34 प्रतिशत, श्रीगंगानगर में 42.74 प्रतिशत और हनुमानगढ़ में 43.17 प्रतिशत है।

शहरी निकायों में उदयपुर 35.40 प्रतिशत, बांसवाड़ा 36.54 प्रतिशत, डूंगरपुर 37.26 प्रतिशत, सलूम्बर 37.63 प्रतिशत और प्रतापगढ़ 37.72 प्रतिशत के आंकड़े के साथ निचले स्तर पर हैं।

गांव और शहर की राजनीति पर अलग-अलग असर

आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ग्रामीण राजस्थान में युवा मतदाताओं की हिस्सेदारी अधिक है, जबकि शहरों में 36 से 50 वर्ष आयु वर्ग का प्रभाव तुलनात्मक रूप से मजबूत दिखाई देता है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए गांवों में युवाओं के मुद्दे और शहरों में मध्यम आयु वर्ग की प्राथमिकताएं चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं।

युवा मतदाताओं के मुद्दों में रोजगार, शिक्षा, नशे की बढ़ती समस्या, ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई, स्वास्थ्य सुविधाएं, पेयजल, सड़क और स्थानीय स्तर पर विकास प्रमुख हो सकते हैं। पंचायत एवं निकाय चुनावों में युवा प्रतिनिधित्व बढ़ने से स्थानीय समस्याओं को लेकर नई राजनीतिक प्राथमिकताएं सामने आने की संभावना है।

जेन-जी के बढ़ते प्रभाव से बदल सकता है चुनावी गणित

18 से 35 वर्ष आयु वर्ग की बड़ी आबादी पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों के लिए चुनौती भी है और अवसर भी। मोबाइल और डिजिटल माध्यमों से लगातार जुड़ी यह पीढ़ी उम्मीदवारों के कामकाज, स्थानीय विकास और मुद्दों को लेकर अधिक जानकारी हासिल कर सकती है। ऐसे में केवल पारंपरिक जातीय या क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर चुनावी रणनीति बनाना राजनीतिक दलों के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

विश्लेषण के अनुसार पंचायत एवं शहरी निकाय चुनावों में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता, रोजगार के अवसर, स्थानीय विकास, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दे युवाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

गांव में युवा, शहर में मध्यम आयु वर्ग का असर

आंकड़ों में 60 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं की हिस्सेदारी गांव और शहर दोनों क्षेत्रों में लगभग समान बताई गई है। वहीं शहरों में 36 से 50 वर्ष आयु वर्ग का अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक है। इससे राजस्थान की स्थानीय राजनीति में क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग आयु वर्गों का प्रभाव सामने आता है।

निष्कर्ष: राजस्थान में 2.40 करोड़ से अधिक युवा मतदाताओं की मौजूदगी आगामी पंचायत और निकाय चुनावों के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में युवा वोट बैंक विशेष रूप से मजबूत होने के कारण गांव की चौपाल से लेकर नगर निकायों तक राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को युवा मतदाताओं की अपेक्षाओं पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है। आने वाले चुनावों में यह युवा वर्ग केवल संख्या नहीं, बल्कि निर्णायक चुनावी ताकत के रूप में सामने आ सकता है।

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