Road Accident: एक साथ मां, पत्नी और भाभियों के शव देखकर टूट गया युवक, कांपते हाथों से पहुंचाया अस्पताल, हादसे में 7 महिलाओं की दर्दनाक मौत

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Road Accident: एक साथ मां, पत्नी और भाभियों के शव देखकर टूट गया युवक, कांपते हाथों से पहुंचाया अस्पताल, हादसे में 7 महिलाओं की दर्दनाक मौत

Road Accident: दुख और दर्द की यह तस्वीर किसी भी इंसान को भीतर तक हिला देने वाली है। एक तरफ सड़क हादसे में पूरी तरह क्षतिग्रस्त कार और उसके भीतर फंसी मां, पत्नी और भाभियों के खून से सने शव—इस भयावह दृश्य को हरसावा में हादसे के पीछे चल रहे परिवार के पुरुषों ने अपनी आंखों से देखा। यह ऐसा मंजर था, जिसे देखकर मजबूत दिल वाला इंसान भी कांप उठे।

हादसा होते ही कुछ पल के लिए सभी स्तब्ध रह गए। इसके बाद चीख-पुकार मच गई और परिजन बदहवास हालत में कार की ओर दौड़े। सबसे पहले मोहनी देवी के बेटे ललित मौके पर पहुंचे और अपनों को बचाने की उम्मीद में कार से निकालने में जुट गए। कुछ ही देर में 6–7 अन्य लोग भी मदद के लिए पहुंच गए। कांपते हाथों से अपने ही परिवार के शवों को बाहर निकालना ऐसा दृश्य था, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।

दो मिनट पहले ही निकले थे आगे:-

जानकारी के अनुसार महिलाओं से भरी कार सबसे पीछे चल रही थी। हादसे से करीब दो मिनट पहले चालक ने आगे चल रही पुरुषों की कार को ओवरटेक कर पीछे किया था। कुछ ही देर बाद यह कार भीषण हादसे का शिकार हो गई।

पूरा गांव स्तब्ध:-

हरसावा हादसे में मां की ममता, बेटी की हंसी और दो बहुओं समेत सात महिलाओं की जिंदगी एक झटके में खत्म हो गई। इस दर्दनाक घटना से पूरा गांव सन्न रह गया। मकर संक्रांति की खुशियों के बीच अचानक मातम छा गया। जहां कुछ देर पहले उत्सव का माहौल था, वहां गहरी खामोशी पसर गई। गांव में हर किसी की जुबान पर यही सवाल था—काश महिलाएं एक ही कार में नहीं बैठी होतीं।

घर की गाड़ियां, किराये का चालक:-

मृतकों का परिवार फिल्टर पानी और वाहनों के कारोबार से जुड़ा बताया जा रहा है। अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए परिवार और रिश्तेदार चार गाड़ियों में रवाना हुए थे। इनमें से दो गाड़ियां परिवार की थीं। हादसे का शिकार हुई कार के लिए चालक वसीम को किराए पर लिया गया था, जबकि पुरुषों वाली गाड़ी मोहनी देवी का बेटा ललित खुद चला रहा था।

सुविधा के लिए महिलाओं को बैठाया गया अलग:-

परिवार के करीब 16 सदस्य यात्रा में शामिल थे, जिनमें आठ महिलाएं थीं। महिलाओं की सुविधा और सहजता को ध्यान में रखते हुए उन्हें अलग कार में बैठाया गया था। दुर्भाग्यवश यही फैसला हादसे में सात महिलाओं की जान ले बैठा।

ट्रॉमा सेंटर और मोर्चरी में भी पसरा मातम:-

हादसे के बाद ट्रॉमा सेंटर और मोर्चरी के बाहर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की भीड़ जुट गई। हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश करता नजर आया। लोगों का कहना था कि सुबह तक सब कुछ सामान्य था और शाम होते-होते पूरा परिवार उजड़ गया। सूचना पर विधायक हाकम अली खान, भाजपा नेता इंजीनियर श्रवण चौधरी, मधुसूदन भिंडा, सभापति मुश्ताक नजवी सहित कई लोग मौके पर पहुंचे।