RBI MPC बैठक: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ा; महंगाई पर आरबीआई की चिंता कायम

नई दिल्ली। Rkhabar
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अगस्त 2026 की बैठक में लगातार दूसरी बार प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। तीन से पांच अगस्त तक चली बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रहेगी। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना ‘न्यूट्रल’ पॉलिसी रुख भी जारी रखा है।
हालांकि, आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर (GDP Growth) का अनुमान बढ़ाते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है। वहीं दूसरी ओर, बढ़ती खुदरा महंगाई (Retail Inflation) को लेकर चिंता भी व्यक्त की गई है। आरबीआई का कहना है कि महंगाई फिलहाल उसके 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है और आने वाले महीनों में खाद्य एवं ईंधन की कीमतों के कारण इसमें और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
रेपो रेट में राहत नहीं, ईएमआई फिलहाल रहेगी समान
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का सीधा असर यह होगा कि बैंकों के लिए आरबीआई से कर्ज लेने की लागत पहले जैसी ही रहेगी। ऐसे में आम लोगों की होम लोन, कार लोन और अन्य ऋणों की ईएमआई में तत्काल किसी प्रकार की राहत मिलने की संभावना नहीं है। हालांकि बैंक अपनी आंतरिक नीतियों के आधार पर ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं।
खुदरा महंगाई लक्ष्य से ऊपर
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि हाल के महीनों में खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई है। हालांकि कोर महंगाई अभी भी नियंत्रित स्तर पर बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) में महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंच सकती है, जिसके बाद इसमें धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है। आरबीआई का मानना है कि फिलहाल आपूर्ति पक्ष से जुड़े दबाव महंगाई को प्रभावित कर रहे हैं।
खुदरा महंगाई का नया अनुमान
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले के अनुमान से 0.10 प्रतिशत (10 बेसिस प्वाइंट) कम है।
तिमाहीवार अनुमान इस प्रकार है—
- पहली तिमाही (Q1): 5.3%
- दूसरी तिमाही (Q2): 4.7%
- तीसरी तिमाही (Q3): 5.9%
- चौथी तिमाही (Q4): 5.5%
आरबीआई का मानना है कि वर्ष की दूसरी छमाही में महंगाई का दबाव धीरे-धीरे कम हो सकता है, लेकिन खाद्य वस्तुओं और ऊर्जा बाजार पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।
GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7%
भारतीय अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार निजी खपत, घरेलू मांग और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
पहली तिमाही के शुरुआती कॉरपोरेट नतीजे भी उद्योग क्षेत्र में सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। आरबीआई का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
वैश्विक हालात और अल नीनो से बढ़ी चिंता
आरबीआई ने चेतावनी दी है कि अल नीनो, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव महंगाई के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं। यदि खाद्य एवं ईंधन की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो इसका असर अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
गवर्नर ने कहा कि वैश्विक व्यापार नीति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण भविष्य की आर्थिक स्थिति पर नजर बनाए रखना आवश्यक है और आगे के नीतिगत फैसले महंगाई तथा वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।
क्या है इसका असर?
आरबीआई के फैसले से स्पष्ट संकेत मिलता है कि फिलहाल केंद्रीय बैंक आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। जीडीपी वृद्धि अनुमान बढ़ना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन महंगाई का लक्ष्य से ऊपर बने रहना आने वाले महीनों में आरबीआई की सबसे बड़ी चुनौती रहेगा। यदि महंगाई नियंत्रित होती है तो भविष्य की मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरों को लेकर नए फैसले लिए जा सकते हैं।