ईरान-इजरायल युद्ध में सीकर के विक्रम की मौत, बहनों की शादी के लिए गया था कमाने, शव देख चीख उठीं बहनें, ‘भैया किसके भरोसे छोड़ गए’

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Rajsthan News : पश्चिम एशिया में भड़की जंग की आंच अब राजस्थान के घरों तक पहुंचने लगी है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने सीकर जिले के एक साधारण परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली हैं।

रोजी-रोटी की तलाश में ओमान गए सीकर के 22 वर्षीय युवक विक्रम वर्मा की ड्रोन हमले में दर्दनाक मौत हो गई। मंगलवार को जब उसका पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव अगलोई पहुंचा, तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

23 फरवरी को उड़ान, 13 मार्च को मौत:-

खंडेला क्षेत्र के रहने वाले विक्रम वर्मा महज 20 दिन पहले (23 फरवरी) ही बेहतर भविष्य के सपनों के साथ ओमान गया था। वहां वह एक निर्माण कंपनी में सड़क परियोजनाओं पर काम कर रहा था।

किसे पता था कि जिस रेगिस्तान में वह पसीना बहाकर अपनी बहनों की शादी के लिए पैसे जुटाने गया है, वही उसकी कब्रगाह बन जाएगा। 13 मार्च को हुए भीषण ड्रोन हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

आखिरी वीडियो कॉल: हालात बिगड़ते जा रहे हैं…

मौत से एक दिन पहले, 12 मार्च की रात विक्रम ने अपने परिवार से वीडियो कॉल पर बात की थी। उसने बताया था कि वहां हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। उसने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई थी।

परिजनों ने उसे हिम्मत बंधाई, लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि यह बातचीत आखिरी साबित होगी। बाद में घटना की सूचना उसके ममेरे भाई ने दी, जो उसी कंपनी में अन्य स्थान पर कार्यरत था।

उजड़ गया परिवार: पीछे छोड़ गया बीमार मां और तीन बहनें

विक्रम अपने परिवार का इकलौता सहारा था। उसके कंधों पर पूरे घर की जिम्मेदारी थी। विक्रम की मां पिछले छह महीनों से बीमार होकर बिस्तर पर हैं। तीन बहनों में वह अकेला भाई था। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, जबकि दो छोटी बहनों की पढ़ाई और शादी की जिम्मेदारी उसी पर थी।

पिता की सीमित आय और पहले से चल रहे कर्ज के कारण विक्रम ने विदेश जाकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का फैसला लिया था। उसे उम्मीद थी कि वह कर्ज उतारकर घर की हालत सुधार देगा, लेकिन उसकी मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया।

ब्यावर के पप्पू सिंह की भी गई जान:-

इस हमले में सिर्फ विक्रम ही नहीं, बल्कि ब्यावर जिले के रायपुर उपखंड के लालपुरा निवासी पप्पू सिंह की भी जान चली गई। पप्पू सिंह भी 23 फरवरी को ही विक्रम के साथ ओमान गया था। मंगलवार को दोनों के शव जयपुर एयरपोर्ट लाए गए, जहां से एम्बुलेंस के जरिए उनके गांवों तक पहुंचाया गया।

नम आंखों से अंतिम विदाई:-

मंगलवार को अगलोई गांव में गमगीन माहौल में विक्रम का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। हर आंख नम थी और लोगों के दिलों में गुस्सा भी था कि दो देशों के संघर्ष में एक निर्दोष भारतीय मजदूर की जान चली गई।

जब परिजनों ने चिता को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल दहल उठा। गांव में हर तरफ शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।

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