22 संगीन मामलों का आरोपी जम्मू एक्सप्रेस-वे से दबोचा गया, बीकानेर, खाजूवाला और पाली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मिली बड़ी सफलता

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75 हजार का इनामी राकेश प्रजापत नाको-आर्म्स सिंडिकेट सरगना गिरफ्तार, 13 महीने तक पुलिस को देता रहा चकमा

अंतरराज्यीय नशा और हथियार तस्करी के नेटवर्क पर पुलिस ने बड़ी चोट करते हुए 75 हजार रुपये के इनामी बदमाश राकेश प्रजापत को गिरफ्तार कर लिया है। 22 आपराधिक मामलों में वांछित यह आरोपी पिछले 13 महीनों से लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस से बचता रहा। बीकानेर स्पेशल टीम, खाजूवाला थाना और पाली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जम्मू एक्सप्रेस-वे से हुई इस गिरफ्तारी के बाद अंतरराष्ट्रीय नाको-आर्म्स सिंडिकेट से जुड़े कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

बीकानेर/खाजूवाला। Rkhabar


बीकानेर पुलिस की स्पेशल टीम, खाजूवाला थाना पुलिस और पाली जिले की शिवपुरा थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय नाको-आर्म्स सिंडिकेट के मुख्य सरगना एवं 75 हजार रुपये के इनामी बदमाश राकेश प्रजापत को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता मिली है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और उस पर बीकानेर रेंज की ओर से 50 हजार तथा पाली पुलिस की ओर से 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ कर्नाटक, गोवा, पंजाब और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों में 22 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें एनडीपीएस एक्ट, हथियार तस्करी, लूट, डकैती और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं। पुलिस काफी समय से उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन वह लगातार अपने ठिकाने बदलकर गिरफ्तारी से बचता रहा।

13 महीनों में कई राज्यों में बदलता रहा ठिकाना

जांच में सामने आया कि राकेश प्रजापत पिछले लगभग 13 महीनों से लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। वह अलग-अलग राज्यों में पहचान छिपाकर रह रहा था और मोबाइल फोन तथा सोशल मीडिया का सीमित उपयोग कर पुलिस की निगरानी से बचने का प्रयास करता रहा। इसके बावजूद पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर तंत्र और लगातार निगरानी के आधार पर उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखी। गिरफ्तारी के समय वह जम्मू एक्सप्रेस-वे के आसपास मौजूद था, जहां से पुलिस ने उसे दबोच लिया।

फरिदकोट जेल से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के संपर्क में आया

पुलिस जांच के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान पंजाब की फरीदकोट जेल में बंद रहने के दौरान आरोपी की पहचान अंतरराष्ट्रीय नशा एवं हथियार तस्करी नेटवर्क से जुड़े लोगों से हुई। जेल से बाहर आने के बाद उसने पुराने साथियों से संपर्क कर ड्रोन के जरिए सीमा पार से हेरोइन मंगवाने और विभिन्न राज्यों में इसकी सप्लाई कराने का नेटवर्क तैयार किया। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह के तार पाकिस्तान से संचालित तस्करी मॉड्यूल से भी जुड़े हुए हैं।

ड्रोन से आने वाली खेप पहुंचाने में निभाता था अहम रोल

पुलिस के अनुसार राकेश प्रजापत का गिरोह भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से ड्रोन के माध्यम से भेजी जाने वाली हेरोइन की खेप को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम करता था। इसके बाद नेटवर्क के जरिए यह मादक पदार्थ पंजाब सहित अन्य राज्यों तक पहुंचाया जाता था। गिरोह पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग वाहनों और फर्जी पहचान का भी उपयोग करता था।

70 करोड़ की हेरोइन बरामदगी के बाद आया था सुर्खियों में

राकेश प्रजापत का नाम उस समय प्रमुखता से सामने आया था, जब पूगल क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना के बाद स्कूटी से करीब 14 किलो हेरोइन बरामद हुई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 70 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया था, जबकि मुख्य सरगना राकेश प्रजापत फरार हो गया था।

कई राज्यों में फैला था नेटवर्क

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी का नेटवर्क राजस्थान, पंजाब, गोवा, कर्नाटक सहित कई राज्यों तक फैला हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी के साथ-साथ हथियारों की सप्लाई और अन्य संगठित अपराध भी संचालित किए जाते थे। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर उसके अन्य सहयोगियों, वित्तीय लेन-देन और अंतरराज्यीय नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

पुलिस का कहना है कि राकेश प्रजापत की गिरफ्तारी से नाको-आर्म्स सिंडिकेट के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है और पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में कई अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।

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