राजस्थान: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान, गाय को मां कहने का साहस क्यों नहीं दिखाती सरकारें?

राजस्थान: कोटा, उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शनिवार को कोटा पहुंचे। विनोबा भावे नगर स्थित दशनाम गोस्वामी समाज भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गो-रक्षा, शिक्षा, मिलावट और वर्तमान सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बात की।
गो-रक्षा पर सरकार को घेरा:-
शंकराचार्य ने कहा कि सरकार कई अच्छे काम कर रही हो सकती है, लेकिन यह भी सच है कि सरकार आज गाय को मां नहीं कह पा रही। उन्होंने मांग की कि गाय को पशु की श्रेणी से हटाकर मां का दर्जा दिया जाए। उनका कहना था कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में गाय को हमेशा मां का स्थान मिला है।
‘अंग्रेजियत’ पर उठाए सवाल:-
उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी सोच में बदलाव नहीं आया है और “अंग्रेजियत” का प्रभाव अभी भी दिखाई देता है। गाय को पशु मानना और गोमांस का खुलेआम व्यापार होना गंभीर चिंता का विषय है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकारें वास्तव में भारतीय संस्कृति और मूल्यों के अनुरूप काम कर रही हैं।
हिंदू राष्ट्र पर रखी राय:-
हिंदू राष्ट्र के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह विचार कई लोगों को अच्छा लग सकता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में देश धर्मनिरपेक्ष है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, उन्हें सबसे पहले गो-रक्षा के लिए सख्त कानून बनवाने की दिशा में काम करना चाहिए।
युद्ध और विद्वानों की भूमिका:-
देश-दुनिया में बन रहे युद्ध जैसे हालातों पर उन्होंने कहा कि विद्वानों और बुद्धिजीवियों को आगे आकर सही और गलत के बीच स्पष्ट अंतर बताना चाहिए, ताकि अन्याय करने वालों पर नैतिक दबाव बने।
कोचिंग छात्रों के लिए संदेश:-
कोटा में पढ़ने आने वाले छात्रों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि केवल सफलता का रास्ता दिखाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें धैर्य और आत्मविश्वास भी सिखाया जाना चाहिए। एक बार की असफलता को जीवन की हार नहीं मानना चाहिए और ऐसे समय में बच्चों का साथ देना जरूरी है।
मिलावट और दिखावे पर चिंता:-
उन्होंने मिलावटखोरी और धर्म में बढ़ते दिखावे पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि अशुद्ध सामग्री से पूजा करने का कोई अर्थ नहीं है। धर्म के नाम पर दिखावा करना गलत है और इसमें सुधार की जरूरत है।