राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव: फर्जी मतदान पर सख्ती, राज्य निर्वाचन आयोग अलर्ट; वोट डालने के लिए पहचान पत्र अनिवार्य

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जयपुर | Rkhabar

राजस्थान में प्रस्तावित पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और मतदान दलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदान के दौरान प्रत्येक मतदाता की पहचान का भौतिक सत्यापन किया जाए तथा फर्जी मतदान रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाए।

आयोग ने साफ कर दिया है कि मतदान केंद्र पर आने वाले प्रत्येक मतदाता को अपना वैध पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा। यदि कोई व्यक्ति दूसरे के नाम पर, मृत या काल्पनिक व्यक्ति के नाम से मतदान करने का प्रयास करता है या एक बार मतदान करने के बाद दोबारा वोट डालने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

5 अगस्त के बाद आरक्षण प्रक्रिया में आएगी तेजी

पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों को लेकर ओबीसी आयोग की रिपोर्ट 5 अगस्त को प्रस्तुत होने की संभावना है। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार को 15 अगस्त से पहले आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित होने की दिशा में तेजी आने की उम्मीद है।

इधर जिला निर्वाचन कार्यालयों और उपखंड निर्वाचन कार्यालयों में चुनावी तैयारियों को लेकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी कार्य तेज कर दिया है।

‘एक राज्य, एक चुनाव’ की दिशा में सरकार

राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पदभार संभालने के बाद ही “एक राज्य, एक चुनाव” व्यवस्था की बात कही थी। उनका कहना है कि यदि पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ होंगे तो बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू नहीं होगी, जिससे विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे। साथ ही जनप्रतिनिधियों को अपने कार्यकाल में विकास कार्यों के लिए अधिक समय मिल सकेगा।

फर्जी मतदान पर एक वर्ष तक की सजा

राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार यदि कोई व्यक्ति—

किसी अन्य मतदाता के नाम से वोट डालता है,

मृत या काल्पनिक व्यक्ति के नाम पर मतदान करता है,

एक बार मतदान करने के बाद दोबारा वोट डालने का प्रयास करता है,

तो उसे फर्जी मतदान का दोषी माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को एक वर्ष तक का कारावास, जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।

इन दस्तावेजों के आधार पर भी कर सकेंगे मतदान

यदि किसी मतदाता के पास मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) उपलब्ध नहीं है, तो आयोग द्वारा मान्य वैकल्पिक दस्तावेजों के आधार पर मतदान किया जा सकेगा। इनमें शामिल हैं—

आधार कार्ड

मनरेगा जॉब कार्ड

बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक

श्रम मंत्रालय की योजना के तहत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड

ड्राइविंग लाइसेंस

पैन कार्ड

भारतीय पासपोर्ट

फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज

सरकारी या सार्वजनिक उपक्रम द्वारा जारी पहचान पत्र

सांसद एवं विधायक पहचान पत्र

यूडीआईडी (दिव्यांग) कार्ड

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि परिवार के मुखिया के दस्तावेज के आधार पर अन्य सदस्यों की पहचान केवल उसी स्थिति में स्वीकार की जाएगी, जब सभी सदस्य एक साथ उपस्थित हों और उनकी पहचान स्पष्ट रूप से सत्यापित हो सके।

मतदान दलों को विशेष निर्देश

निर्वाचन आयोग ने सभी मतदान दलों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक मतदाता की पहचान का भौतिक सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग का उद्देश्य निष्पक्ष, पारदर्शी और विवाद-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करना है।

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