राजस्थान में निकाय प्रमुखों के आरक्षण की लॉटरी 13 अगस्त को, वार्ड आरक्षण पर सस्पेंस बरकरार

309 नगरीय निकायों के महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के आरक्षण की होगी लॉटरी, कई कलेक्टरों ने 15 अगस्त के बाद वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया कराने का दिया सुझाव
जयपुर। Rkhabar
राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के प्रमुख पदों—महापौर, सभापति और अध्यक्ष—के आरक्षण की लॉटरी 13 अगस्त को निकाली जाएगी। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से राजनीतिक दलों को इसकी सूचना भेज दी गई है। निकाय प्रमुखों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी तैयारियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
हालांकि वार्डों के आरक्षण की लॉटरी को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हुई है। सरकार की ओर से वार्ड आरक्षण की तारीख पर अंतिम फैसला नहीं किया गया है। कई जिलों के कलेक्टरों ने प्रशासनिक व्यस्तताओं का हवाला देते हुए सरकार से 15 अगस्त के बाद वार्ड आरक्षण की लॉटरी कराने का आग्रह किया है।
13 अगस्त को होगी निकाय प्रमुखों की लॉटरी
स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार निकाय प्रमुख पदों के आरक्षण की लॉटरी 13 अगस्त को सुबह 10:30 बजे स्वायत्त शासन विभाग के सभागार में शुरू होगी। रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रक्रिया ऑनलाइन तरीके से कराई जाएगी।
महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के साथ ही राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों की गतिविधियां भी तेज हो जाएंगी। आरक्षण की श्रेणी तय होने के बाद कई निकायों में दावेदारों के समीकरण बदल सकते हैं।
वार्ड आरक्षण पर अभी तस्वीर साफ नहीं
निकाय प्रमुखों के आरक्षण की तारीख तय हो गई है, लेकिन वार्डों की आरक्षण लॉटरी को लेकर अभी असमंजस बना हुआ है। वार्ड आरक्षण सीधे तौर पर स्थानीय चुनावी समीकरणों को प्रभावित करता है। किसी वार्ड के सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य आरक्षित श्रेणी में आने से संभावित उम्मीदवारों की दावेदारी पर असर पड़ सकता है।
यही कारण है कि राजनीतिक दलों के साथ-साथ संभावित प्रत्याशी भी वार्ड आरक्षण की तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
कलेक्टरों ने 15 अगस्त के बाद का समय सुझाया
रिपोर्ट के अनुसार बीकानेर, अलवर, जयपुर, उदयपुर और झुंझुनूं सहित कई जिलों के कलेक्टरों ने सरकार को पत्र भेजकर 15 अगस्त के बाद वार्ड आरक्षण की लॉटरी कराने का आग्रह किया है।
कलेक्टरों ने इसके पीछे स्वतंत्रता दिवस समारोह सहित अन्य प्रशासनिक एवं सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्तता का हवाला दिया है। ऐसे में संभावना है कि वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया की तारीख में बदलाव किया जा सकता है।
वार्ड आरक्षण बदलते ही बदलेंगे चुनावी समीकरण
वार्डों के आरक्षण की लॉटरी को आगामी निकाय चुनाव की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिस वार्ड की आरक्षण श्रेणी बदलती है, वहां पहले से चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदारों की रणनीति भी बदल सकती है।
मसलन, यदि कोई सामान्य वार्ड आरक्षित श्रेणी में चला जाता है तो वहां सामान्य वर्ग के संभावित दावेदारों की दावेदारी प्रभावित हो सकती है। इसी तरह महिला आरक्षण लागू होने पर राजनीतिक दलों को नए चेहरों को मैदान में उतारने की रणनीति बनानी पड़ सकती है।
इस वजह से राजनीतिक दलों के स्थानीय संगठन भी वार्ड आरक्षण की घोषणा पर नजर बनाए हुए हैं।
राजनीतिक दलों को भेजी गई सूचना
स्वायत्त शासन विभाग ने 13 अगस्त को होने वाली निकाय प्रमुखों की आरक्षण लॉटरी की सूचना राजनीतिक दलों को भी भेज दी है। इससे प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है।
राजनीतिक दलों के लिए निकाय प्रमुखों के पदों का आरक्षण महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके आधार पर पार्टी स्तर पर संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा और स्थानीय स्तर पर चुनावी रणनीति तैयार की जाएगी।
स्वतंत्रता दिवस के बाद बढ़ेगी चुनावी गतिविधियां
प्रदेश में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह होने हैं। कई जिलों में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। इसी के चलते कलेक्टरों ने वार्ड आरक्षण की लॉटरी को 15 अगस्त के बाद कराने का सुझाव दिया है।
वहीं, 16 अगस्त को अलवर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है। ऐसे में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया की तारीख को लेकर अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
309 निकायों में चुनावी तस्वीर होगी स्पष्ट
राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में प्रमुख पदों के आरक्षण की लॉटरी होने के बाद चुनावी प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा स्पष्ट हो जाएगा। इसके बाद वार्ड आरक्षण की स्थिति सामने आने पर स्थानीय स्तर पर दावेदारों और राजनीतिक दलों की गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल 13 अगस्त को निकाय प्रमुखों की आरक्षण लॉटरी तय है, जबकि वार्ड आरक्षण की लॉटरी कब होगी, इस पर सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार है। वार्ड आरक्षण की तारीख और आरक्षण श्रेणियां सामने आते ही निकाय चुनाव की जमीनी तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।