Rajasthan Crop Insurance: राजस्थान में फसल बीमा नियमों में बड़ा बदलाव, किसानों को 7 दिन में मिलेगी पॉलिसी

जयपुर | RKhabar
राजस्थान सरकार ने किसानों के हित में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बड़ा बदलाव किया है। अब फसल बीमा कराने के बाद किसानों को अपनी पॉलिसी के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राज्य में पहली बार ऐसा नियम लागू किया गया है, जिसके तहत बीमा कंपनियों को बीमा कराने के 7 दिनों के भीतर किसानों को फसल बीमा पॉलिसी उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
कृषि विभाग ने खरीफ-2026 से रबी-2026-27 तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही चयनित बीमा कंपनियों के साथ अनुबंध भी कर लिया गया है।
बैंकों की लापरवाही पर अब भरना होगा नुकसान
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई बैंक किसान के खाते से फसल बीमा का प्रीमियम काट लेता है, लेकिन उसे राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर समय पर दर्ज नहीं करता या किसी प्रकार की लापरवाही करता है, तो किसान के दावे (क्लेम) का पूरा भुगतान संबंधित बैंक को अपनी ओर से करना होगा। इससे किसानों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
तकनीक से होगा फसल नुकसान का आकलन
फसल नुकसान के आकलन में पारदर्शिता लाने और मानवीय त्रुटियों को कम करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत—
50% आकलन खेतों में जाकर फसल कटाई प्रयोग (Crop Cutting Experiment) के आधार पर होगा।
50% आकलन सैटेलाइट, रिमोट सेंसिंग, मौसम संबंधी आंकड़ों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉडलिंग से किया जाएगा।
दोनों तरीकों के संयुक्त परिणाम के आधार पर अंतिम उपज का निर्धारण किया जाएगा।
25 फसलों को योजना में शामिल किया गया
खरीफ की 14 फसलें
बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, चंवला, उड़द, अरहर, सोयाबीन, तिल, धान, कपास और मूंगफली।
रबी की 11 फसलें
गेहूं, जौ, चना, सरसों, तारामीरा, जीरा, धनिया, ईसबगोल, मेथी, रबी मक्का और मसूर।
किसानों को कितना प्रीमियम देना होगा?
नई व्यवस्था के अनुसार किसानों को सीमित प्रीमियम ही देना होगा—
खरीफ फसलें: बीमित राशि का अधिकतम 2%
रबी फसलें: बीमित राशि का 1.5%
वाणिज्यिक एवं उद्यानिकी फसलें: बीमित राशि का 5%
शेष प्रीमियम राशि केंद्र और राज्य सरकार अनुदान के रूप में वहन करेंगी।
नियम तोड़ने वाली बीमा कंपनियों पर होगी कार्रवाई
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि चयनित बीमा कंपनियों के कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी। अनुबंध या परिचालन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजस्थान का 64% कृषि क्षेत्र अब भी बीमा से बाहर
सरकार द्वारा हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद राज्य का बड़ा कृषि क्षेत्र अब भी फसल बीमा योजना से नहीं जुड़ पाया है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्थान के कुल कृषि क्षेत्र का केवल 36 प्रतिशत हिस्सा ही बीमित हो सका, जबकि 64 प्रतिशत कृषि क्षेत्र अभी भी बीमा सुरक्षा से बाहर है।
सबसे अधिक बीमा कवरेज चूरू (77%) में दर्ज की गई, जबकि धौलपुर (5%), करौली (7%) और दौसा (9%) सबसे पीछे रहे।
बीमा दावों में बीकानेर भी प्रमुख जिलों में शामिल
पिछले पांच वर्षों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को 18,189.16 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया गया।
सबसे अधिक भुगतान वाले जिले—
चूरू – 2,459.63 करोड़ रुपये
हनुमानगढ़ – 2,253.59 करोड़ रुपये
जोधपुर – 1,570.94 करोड़ रुपये
जालोर – 1,392.02 करोड़ रुपये
नागौर – 1,287.89 करोड़ रुपये
बीकानेर – 1,101.64 करोड़ रुपये
जबकि सबसे कम भुगतान राजसमंद, धौलपुर और करौली जिलों में दर्ज किया गया।
RKhabar निष्कर्ष
राजस्थान सरकार की नई व्यवस्था से किसानों को समय पर फसल बीमा पॉलिसी मिलने के साथ-साथ बैंक और बीमा कंपनियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। तकनीक आधारित नुकसान आकलन से दावों के निपटारे में पारदर्शिता आने की उम्मीद है, हालांकि राज्य के 64 प्रतिशत कृषि क्षेत्र को अब भी फसल बीमा योजना से जोड़ना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।