राजस्थान कांग्रेस में फिर तेज हुई सियासी हलचल, डोटासरा के ‘सेल्फ ब्रांडिंग’ बयान पर अशोक गहलोत ने तोड़ी चुप्पी, बोले- कोई नाराज़गी नहीं

राजस्थान कांग्रेस में फिर तेज हुई सियासी हलचल, डोटासरा के ‘सेल्फ ब्रांडिंग’ बयान पर अशोक गहलोत ने तोड़ी चुप्पी, बोले- कोई नाराज़गी नहीं, AI फोटो
जयपुर | Rkhabar
राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के ‘सेल्फ ब्रांडिंग’ और ‘व्यक्तिवाद’ पर दिए गए बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सभी अटकलों को खारिज किया है। गहलोत ने स्पष्ट कहा कि उनके और डोटासरा के बीच किसी प्रकार की नाराज़गी या मतभेद नहीं है और कांग्रेस पूरी तरह एकजुट होकर आगामी चुनाव लड़ेगी।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम से पहले बांसवाड़ा क्षेत्र के पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय अपने समर्थकों और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) से जुड़े करीब 300 से 400 कार्यकर्ताओं के साथ सीधे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सिविल लाइंस स्थित आवास पहुंच गए।
यहां गहलोत ने सभी कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए उन्हें कांग्रेस का दुपट्टा पहनाया। इस दौरान समर्थकों ने “अशोक गहलोत को चौथी बार मुख्यमंत्री बनाओ” के नारे भी लगाए। इसके बाद सभी कार्यकर्ता पीसीसी कार्यालय पहुंचे, जहां उनका औपचारिक स्वागत कार्यक्रम रखा गया था।
इसी घटनाक्रम को लेकर प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा नाराज़ नजर आए।
डोटासरा ने क्या कहा?
पीसीसी कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान डोटासरा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कांग्रेस को किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि संगठन की मजबूती की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि—
“अगर किसी को अपनी ब्रांडिंग करनी है तो वह उनकी इच्छा है, लेकिन मैं केवल कांग्रेस पार्टी की ब्रांडिंग करूंगा। जब तक प्रदेश अध्यक्ष हूं, संगठन को मजबूत करने का काम करता रहूंगा।”
डोटासरा ने यह भी कहा कि व्यक्तिवाद और व्यक्तिगत छवि को पार्टी से ऊपर रखने की राजनीति के कारण कांग्रेस को कई बार नुकसान उठाना पड़ा है।
गहलोत ने दिया जवाब
डोटासरा के बयान के बाद जब कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चाएं तेज हुईं तो शुक्रवार को अशोक गहलोत ने मीडिया से बातचीत में पूरे घटनाक्रम पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि उनके घर पर कोई आधिकारिक जॉइनिंग कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया था और इसे अनावश्यक रूप से विवाद बनाया जा रहा है।
गहलोत की 5 बड़ी बातें
1. यह सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात थी
गहलोत ने कहा कि उनके आवास पर कोई औपचारिक जॉइनिंग कार्यक्रम नहीं था। कार्यकर्ता जयपुर आए थे और उनसे मिलने की इच्छा जताई थी, इसलिए उन्होंने मुलाकात की।
2. मैंने खुद जयपुर आने से मना किया था
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा था कि वे इतनी दूर यात्रा कर जयपुर न आएं। उन्होंने आश्वासन दिया था कि बांसवाड़ा दौरे के दौरान स्वयं उनसे मिलेंगे, लेकिन लगातार आग्रह के बाद मुलाकात हुई।
3. कार्यकर्ताओं के आने पर विवाद क्यों?
गहलोत ने कहा कि किसी भी दल से कार्यकर्ता कांग्रेस में आना चाहते हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेताओं की औपचारिक जॉइनिंग अलग विषय है, जबकि कार्यकर्ताओं का कांग्रेस से जुड़ना संगठन के लिए सकारात्मक संकेत है।
4. डोटासरा और मेरे बीच कोई मतभेद नहीं
उन्होंने साफ कहा कि न तो प्रदेश अध्यक्ष उनसे नाराज़ हैं और न ही उनके मन में कोई शिकायत है। मीडिया में जिस तरह की चर्चा हो रही है, वास्तविक स्थिति वैसी नहीं है।
5. मीडिया माहौल खराब न करे
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस का कोई भी नेता ऐसा बयान नहीं देगा जिससे पार्टी में टकराव की स्थिति बने। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि अनावश्यक विवाद खड़ा करने से बचें।
कांग्रेस ने दिखाई एकजुटता का संदेश
अशोक गहलोत ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में देश और राजस्थान दोनों को कांग्रेस की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ जनता के बीच जाएगी तथा आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डोटासरा के बयान और उसके बाद गहलोत की सफाई ने राजस्थान कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर चल रही चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। हालांकि दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह के मतभेद से इनकार किया है, लेकिन इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।
एक नजर में
- बांसवाड़ा से आए कार्यकर्ता पहले गहलोत के आवास पहुंचे।
- वहां कांग्रेस का दुपट्टा पहनाने का कार्यक्रम हुआ।
- पीसीसी अध्यक्ष डोटासरा ने ‘सेल्फ ब्रांडिंग’ पर बिना नाम लिए टिप्पणी की।
- गहलोत ने कहा—यह केवल शिष्टाचार मुलाकात थी, कोई जॉइनिंग कार्यक्रम नहीं।
- दोनों नेताओं ने आपसी मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए संगठन की एकजुटता पर जोर दिया।