पंचायत चुनाव पर गत‍िव‍िध‍ियां तेज, राज्‍य न‍िर्वाचन आयोग ने आरक्षण पर नए आंकड़े मांगे

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जयपुर। राजस्थान में पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए पंचायत राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग से आरक्षण से जुड़े अद्यतन आंकड़े उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग का मानना है कि आवश्यक आंकड़े मिलते ही चुनाव कार्यक्रम तय करने की प्रक्रिया को गति दी जा सकेगी।

निर्वाचन आयोग ने संबंधित विभागों और राज्य सरकार को पत्र भेजकर आरक्षण निर्धारण के लिए जरूरी जानकारी मांगी है। आयोग का कहना है कि पंचायत और निकाय चुनावों में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम जारी किया जा सकता है। ऐसे में विभागों से मांगे गए आंकड़े चुनावी प्रक्रिया के लिए अहम माने जा रहे हैं।

गौरतलब है कि चुनावों में हो रही देरी को लेकर आयोग को न्यायालय में भी अपना पक्ष रखना पड़ा था। 15 अप्रैल को चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में आयोग ने कोर्ट को बताया था कि आवश्यक और प्रमाणित आंकड़ों की अनुपलब्धता के कारण चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

हालांकि राज्य सरकार की ओर से पहले ओबीसी आरक्षण से संबंधित आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया था, लेकिन निर्वाचन आयोग का स्पष्ट कहना है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू करने के लिए अंतिम रूप से सत्यापित और आधिकारिक आंकड़ों की आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य से विभागों से दोबारा विस्तृत डेटा उपलब्ध कराने को कहा गया है।

राज्य में पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनाव लंबे समय से लंबित पड़े हैं। ऐसे में आयोग की इस पहल के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चुनावों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आयोग को आवश्यक आंकड़े कब तक उपलब्ध कराती है, क्योंकि इसके बाद ही चुनावी प्रक्रिया की अगली रूपरेखा तय हो सकेगी।

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