राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव की सरगर्मियां तेज: आरक्षण की लॉटरी पर टिकी दावेदारों की नजर, बदल सकते हैं सियासी समीकरण

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राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव की सरगर्मियां तेज: आरक्षण की लॉटरी पर टिकी दावेदारों की नजर, बदल सकते हैं सियासी समीकरण

जयपुर। Rkhabar

राजस्थान में नगर निकाय एवं पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनावी प्रक्रिया शुरू होने की संभावनाओं के बीच राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सबसे अधिक उत्सुकता आरक्षण की लॉटरी को लेकर है, क्योंकि इसी के आधार पर तय होगा कि कौन-सी सीट सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित होगी। आरक्षण तय होने के बाद ही संभावित प्रत्याशियों की चुनावी रणनीति और राजनीतिक दलों की टिकट वितरण प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी।

15 अगस्त से पहले पूरी हो सकती है आरक्षण प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार और संबंधित विभाग चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। संभावना जताई जा रही है कि 15 अगस्त से पहले आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, ताकि चुनाव कार्यक्रम समय पर घोषित किया जा सके।

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले नगर निकाय चुनाव कराए जाएंगे। इनकी अधिसूचना 17 अगस्त के आसपास जारी होने की संभावना है, जबकि पूरी चुनाव प्रक्रिया 20 सितंबर तक संपन्न कराई जा सकती है।

इसके बाद 23 सितंबर के आसपास पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव की घोषणा होने की संभावना है और इनकी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी हो सकती है।

आरक्षण तय करेगा किसकी किस्मत

लंबे समय से अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय संभावित उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की लॉटरी सबसे अहम साबित होने वाली है। कई दावेदार महीनों से जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला आरक्षण सूची जारी होने के बाद ही होगा। यदि किसी सीट की आरक्षण श्रेणी बदलती है तो कई पुराने दावेदारों को चुनाव मैदान से बाहर होना पड़ सकता है, जबकि नए चेहरे राजनीति में प्रवेश कर सकते हैं।

ऐसे होगी आरक्षण की प्रक्रिया

पंचायतीराज संस्थाओं में आरक्षण का निर्धारण अलग-अलग स्तर पर किया जाएगा।

  • ग्राम पंचायतों में वार्ड पंच एवं सरपंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी संबंधित उपखंड अधिकारी (एसडीएम) निकालेंगे।
  • पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य पदों का आरक्षण संबंधित जिला कलक्टर निर्धारित करेंगे।
  • वहीं नगर निकायों में पार्षद, अध्यक्ष और चेयरमैन पदों का आरक्षण भी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से तय किया जाएगा।

महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण

राज्य के चुनावी नियमों के अनुसार पंचायत एवं नगर निकायों के सभी स्तरों पर 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। इसके अलावा एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्गों के लिए भी निर्धारित आरक्षण लागू रहेगा। महिला वर्ग के भीतर भी इन वर्गों के लिए अलग-अलग आरक्षण का प्रावधान रहेगा, जिससे बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधियों को स्थानीय निकायों में नेतृत्व का अवसर मिलेगा।

टिकट की दौड़ हुई तेज

चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही राजनीतिक दलों में टिकट की दौड़ शुरू हो चुकी है। भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दल संभावित उम्मीदवारों से लगातार फीडबैक ले रहे हैं। स्थानीय स्तर पर संगठन बैठकों का दौर जारी है और संभावित प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाने में जुटे हुए हैं।

कई क्षेत्रों में पुराने जनप्रतिनिधियों और नए दावेदारों के बीच टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है। आरक्षण की घोषणा के बाद कई स्थानों पर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदलने की संभावना जताई जा रही है।

शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र में पहली बार दो पंचायत समितियों में चुनाव

इस बार जयपुर जिले के शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव विशेष रूप से चर्चा का विषय बने हुए हैं। राज्य सरकार द्वारा अमरसर को नई पंचायत समिति का दर्जा दिए जाने के बाद पहली बार शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र में दो पंचायत समितियों में चुनाव होंगे।

  • शाहपुरा पंचायत समिति के अंतर्गत 19 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
  • अमरसर पंचायत समिति में 22 ग्राम पंचायतें शामिल की गई हैं।
  • दोनों पंचायत समितियों में 15-15 पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव होगा।
  • वहीं नगर निकाय चुनाव में शाहपुरा नगर परिषद तथा मनोहरपुर नगरपालिका के नए बोर्ड का गठन किया जाएगा।

इस बदलाव के बाद क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

राजनीतिक दल बना रहे नई रणनीति

नगर निकाय और पंचायतीराज चुनावों को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दल पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। संभावित उम्मीदवारों की सामाजिक स्वीकार्यता, संगठनात्मक पकड़ और जीत की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। आरक्षण सूची जारी होने के बाद उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया तेज होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार कई जिलों में सीटों के आरक्षण में बदलाव के कारण स्थानीय राजनीति के समीकरण बदल सकते हैं। कई नए चेहरे चुनाव मैदान में उतरेंगे, जबकि कुछ मौजूदा जनप्रतिनिधियों को सीट बदलनी पड़ सकती है या चुनाव से बाहर होना पड़ सकता है।

स्थानीय चुनावों पर पूरे प्रदेश की नजर

राजस्थान के नगर निकाय और पंचायतीराज चुनावों को आगामी राजनीतिक माहौल की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन चुनावों के परिणाम स्थानीय नेतृत्व की ताकत का आकलन करने के साथ-साथ राजनीतिक दलों की संगठनात्मक स्थिति का भी संकेत देंगे। ऐसे में आरक्षण की लॉटरी से लेकर टिकट वितरण तक हर चरण पर प्रदेशभर के राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की नजरें टिकी हुई हैं।

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