मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बयान से गरमाई राजनीति, बीकानेर में कांग्रेस का प्रदर्शन, सार्वजनिक माफी की उठी मांग

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बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी संक्रमण के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की एक कथित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को कांग्रेस महिला कार्यकर्ताओं ने कोटगेट पर प्रदर्शन कर चिकित्सा मंत्री का पुतला फूंका और बयान पर नाराजगी जताई।

क्या है मामला?

पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं के किडनी संक्रमण और उपचार को लेकर उठे सवालों के बीच चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर गुरुवार को बीकानेर पहुंचे थे। इस दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों ने अस्पताल में इलाज और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल पूछे। इसी दौरान मंत्री द्वारा की गई एक टिप्पणी विवाद का कारण बन गई।

बताया जा रहा है कि सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा, “आप पता करो, बीमार महिलाएं चलते हुए आई थीं या नाचते हुए?” मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

जांच से पहले ही अस्पताल को क्लीन चिट:-

प्रेस वार्ता के दौरान चिकित्सा मंत्री ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली का बचाव करते हुए कहा कि अभी तक इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दवाओं की वजह से मरीजों की तबीयत बिगड़ी है तो उसकी गंभीरता से जांच कराई जा रही है।

मंत्री ने बताया कि प्राथमिक स्तर पर 27 प्रकार की दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

कांग्रेस ने जताया विरोध:-

मंत्री के बयान के विरोध में कांग्रेस महिला कार्यकर्ताओं ने कोटगेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह टिप्पणी महिलाओं की भावनाओं को आहत करने वाली है। विरोध के दौरान मंत्री का पुतला दहन कर बयान वापस लेने और सार्वजनिक माफी की मांग की गई।

ओबीसी कांग्रेस की जिला अध्यक्ष उमा सुथार ने कहा कि प्रसव पीड़ा किसी भी महिला के जीवन का सबसे कठिन दौर होता है और इस विषय पर इस तरह की टिप्पणी करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं में इस बयान को लेकर भारी नाराजगी है और जब तक मंत्री माफी नहीं मांगते, विरोध जारी रहेगा।

वहीं दूसरी ओर, प्रसूताओं के परिजन अस्पताल की व्यवस्थाओं, उपचार प्रक्रिया और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।