80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन: सरकार हर साल खर्च कर रही ₹2.27 लाख करोड़, जानिए कब तक चलेगी योजना

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देश की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजनाओं में शामिल मुफ्त राशन योजना के तहत आज करीब 80 करोड़ लोगों को हर महीने मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। केंद्र सरकार इस योजना पर हर वर्ष करीब ₹2.27 लाख करोड़ खर्च कर रही है। यह व्यवस्था फिलहाल दिसंबर 2028 तक जारी रहेगी।

नई दिल्ली। Rkhabar

भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत देश के करोड़ों गरीब और जरूरतमंद परिवारों को हर महीने मुफ्त राशन उपलब्ध कराया जाता है। वर्तमान में लगभग 80.6 करोड़ लोग इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।

केंद्र सरकार के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना और उनके भोजन पर होने वाले खर्च को कम करना है। कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई मुफ्त राशन व्यवस्था को बाद में स्थायी रूप से विस्तारित कर दिया गया।

क्या है मुफ्त राशन योजना?

मुफ्त राशन योजना का आधार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 है। इस कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की 75 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों की 50 प्रतिशत आबादी को खाद्यान्न उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया था। पहले लाभार्थियों को अनाज रियायती दरों पर मिलता था, लेकिन बाद में इसे पूरी तरह मुफ्त कर दिया गया।

कैसे बदली योजना?

कोविड-19 महामारी के दौरान अप्रैल 2020 में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) शुरू की गई। इसके तहत NFSA के राशन के अतिरिक्त मुफ्त अनाज दिया गया।

इसके बाद दिसंबर 2022 में केंद्र सरकार ने PMGKAY को NFSA में शामिल कर दिया और 1 जनवरी 2023 से सभी पात्र लाभार्थियों को पूरी तरह मुफ्त राशन देने का फैसला लागू किया।

फिर नवंबर 2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस व्यवस्था को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाते हुए दिसंबर 2028 तक जारी रखने का निर्णय लिया।

किन लोगों को मिलता है लाभ?

योजना के तहत दो प्रमुख श्रेणियों के परिवारों को लाभ मिलता है—

प्राथमिकता परिवार (PHH): प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो खाद्यान्न।

अंत्योदय अन्न योजना (AAY): प्रति परिवार प्रति माह 35 किलो खाद्यान्न।

इनमें चावल, गेहूं तथा कई राज्यों में मोटे अनाज भी वितरित किए जाते हैं।

कितने लोग उठा रहे हैं लाभ?

सरकार के अनुसार, NFSA के तहत अधिकतम 81.35 करोड़ लोगों को योजना का लाभ दिया जा सकता है। अगस्त 2025 तक करीब 80.6 करोड़ लाभार्थियों की पहचान की जा चुकी थी। यानी अभी भी लगभग 79 लाख पात्र लोगों को योजना में शामिल किया जा सकता है।

देश की लगभग 140 करोड़ आबादी में से करीब 57 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में इस खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़े हुए हैं।

सरकार पर कितना खर्च आता है?

मुफ्त राशन योजना केंद्र सरकार की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल है।

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए ₹2,27,429 करोड़ (करीब ₹2.27 लाख करोड़) का प्रावधान किया गया है।

यह खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के कुल बजट का लगभग 97 प्रतिशत है।

वर्ष 2025-26 में भी इस योजना पर लगभग इतना ही खर्च किया गया था।

कोविड-19 महामारी के दौरान अप्रैल 2020 से दिसंबर 2022 के बीच अतिरिक्त मुफ्त राशन वितरण पर सरकार ने लगभग ₹3.9 लाख करोड़ खर्च किए थे।

दिसंबर 2028 तक जारी रहेगी योजना

केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि मौजूदा मुफ्त राशन व्यवस्था दिसंबर 2028 तक जारी रहेगी। इस पांच वर्षीय अवधि में सरकार का अनुमानित कुल खर्च लगभग ₹11.8 लाख करोड़ रहेगा। इसी अवधि तक लाभार्थियों को फोर्टिफाइड (पोषणयुक्त) चावल भी उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार का क्या कहना है?

सरकार का कहना है कि यह योजना गरीब और कमजोर वर्गों को खाद्य सुरक्षा देने के लिए चलाई जा रही है ताकि आर्थिक कठिनाइयों के समय भी किसी परिवार को भोजन की कमी का सामना न करना पड़े।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आज भी करीब 80 करोड़ लोगों का मुफ्त राशन पर निर्भर होना देश में आर्थिक असमानता और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों को दर्शाता है। वहीं सरकार का तर्क है कि योजना का दायरा 2011 की जनगणना के आधार पर तय किया गया था और इसका उद्देश्य अधिकतम जरूरतमंद लोगों तक खाद्यान्न पहुंचाना है।

एक नजर में योजना

लाभार्थी: करीब 80.6 करोड़

अधिकतम पात्रता: 81.35 करोड़

PHH लाभ: 5 किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह

AAY लाभ: 35 किलो प्रति परिवार प्रति माह

वार्षिक खर्च: ₹2.27 लाख करोड़

पूरी तरह मुफ्त राशन लागू: 1 जनवरी 2023

योजना की वर्तमान अवधि: दिसंबर 2028 तक

5 वर्षों का अनुमानित कुल खर्च: ₹11.8 लाख करोड़

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