बीकानेर में ‘फर्जी स्कूल’ का भंडाफोड़, बिना मान्यता तीन साल से चल रही थी पाठशाला, 100 बच्चे नामांकित

बीकानेर। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था जहां से संचालित होती है, उसी बीकानेर शिक्षा निदेशालय के अधीन पांचू ब्लॉक में पिछले तीन साल से ‘फर्जी स्कूल’ चलने का मामला सामने आया है। बिना मान्यता संचालित पीएस मेमोरियल स्कूल का खुलासा शुक्रवार को तब हुआ, जब सीबीईओ प्रेमदान चारण और आरपी सोहनलाल जोशी पारवा गांव में एक सरकारी स्कूल की रैली में पहुंचे।
रैली के दौरान पीईईओ दीपिका ने अधिकारियों को बताया कि निजी स्कूल के चलते सरकारी स्कूल में नामांकन प्रभावित हो रहा है। जब अधिकारियों ने संबंधित स्कूल की मान्यता के दस्तावेज मांगे तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। संदेह होने पर टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जहां हालात चौंकाने वाले मिले।
छोटे मकान में चल रहा था बड़ा खेल:-
स्कूल महज 25×20 फीट के मकान में संचालित हो रहा था। दो कमरों और एक रसोईघर में 100 से अधिक बच्चों को बैठाया गया था। रसोई में चूल्हा और चिमनी तक मौजूद थी। संचालक मोहनलाल के पास मान्यता से जुड़ा कोई दस्तावेज नहीं मिला।
दूसरे स्कूल से सांठगांठ कर जारी होती थी मार्कशीट:-
जांच में सामने आया कि यह स्कूल संगठित ठगी का केंद्र था। संचालक ने जयसिंहदेसर मगरा स्थित नामदेव शिक्षण संस्थान से गठजोड़ कर रखा था। यहां पढ़ने वाले बच्चों को उसी संस्थान के नाम से मार्कशीट और टीसी दी जा रही थी। इसके बदले अभिभावकों से हर महीने 500 से 800 रुपये तक वसूले जा रहे थे। अब विभाग उस संस्थान की मान्यता पर भी कार्रवाई की तैयारी में है।
बच्चों का होगा पुनः प्रवेश
सीबीईओ प्रेमदान चारण ने बताया कि बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया जाएगा। फिलहाल संचालक के अनुरोध और बच्चों को रिलीव करने की सहमति के चलते स्कूल को सीज नहीं किया गया है, लेकिन आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो अभिभावक निजी स्कूल चुनना चाहेंगे, उन्हें मान्यता प्राप्त संस्थानों में भेजा जाएगा।
टीम को देखते ही बजा दी छुट्टी:-
निरीक्षण टीम के पहुंचते ही संचालक ने तुरंत छुट्टी की घंटी बजा दी, ताकि बच्चे बाहर निकल जाएं और स्थिति संभाली जा सके। हालांकि टीम ने बच्चों को रोककर दस्तावेजों की जांच की। स्कूल का ड्रेस कोड और बैनर देखकर पहली नजर में यह वैध स्कूल जैसा ही लग रहा था।
सुरक्षा नियमों की भी अनदेखी:-
बच्चों के परिवहन के लिए एक पुरानी बोलेरो गाड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसके पास बाल वाहिनी का कोई वैध परमिट नहीं था। कम जगह में अधिक बच्चों को ठूंसना और असुरक्षित वाहन से लाना-ले जाना बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।