बीकानेर: शिक्षा विभाग में 37 साल पुराने मामले भी पेंडिंग, कई तो इंतजार में हो गए रिटायर

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बीकानेर: शिक्षा विभाग में 37 साल पुराने मामले भी पेंडिंग, कई तो इंतजार में हो गए रिटायर

बीकानेर। शिक्षा विभाग में प्रशासनिक सुस्ती और ढर्रे का एक ऐसा अनूठा उदाहरण सामने आया है जो सरकारी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विभाग में जर्जर स्कूलों, बजट और नामांकन जैसे पारंपरिक मुद्दों से इतर एक ऐसी गहरी सुस्ती पसरी है, जिसके कारण दोषी कर्मचारियों पर परोक्ष रूप से रहम की जा रही है। दूसरी ओर निर्दोष कार्मिकों को सालों तक जांच प्रक्रिया में उलझाकर मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि विभाग में साल 1989 यानी पिछले 37 सालों से विभागीय जांच के प्रकरण लंबित पड़े हैं। इस कछुआ चाल के कारण कई कार्मिक बिना किसी फैसले के ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं और कइयों की फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।

वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा विभाग के सीसीए-16 अनुभाग के तहत कुल 425 प्रकरण प्रक्रियाधीन हैं। इन लंबित प्रकरणों का विश्लेषण करने पर विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर होती है। कुल मामलों में से 192 मामले ऐसे हैं जिनके पेंडिंग रहने के लिए सीधे तौर पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों का ढर्रा जिम्मेदार है। जानकारों का कहना है कि जो मामले कोर्ट या पुलिस के पास हैं उनमें तो विभाग पैरवी के अलावा ज्यादा कुछ नहीं कर सकता फिर भी कोर्ट में अपना वकील खड़ा करके स्थगन तुड़वाने का प्रयास होना चाहिए जो नहीं हुआ। इसमें अकेले जांच रिपोर्ट अप्राप्त या रिमांड के ही 155 मामले हैं। साफ है कि विभाग के आला अधिकारी जांच अधिकारियों से समय पर रिपोर्ट ही नहीं ले पा रहे हैं। इसके अलावा 24 मामलों में चार्जशीट के जवाब आना बाकी है और 13 मामलों में जांच रिपोर्ट आने के बाद भी आगे की कार्रवाई या अभ्यावेदन अपेक्षित है। केवल साल 2024 से 2026 के बीच ही विभाग के स्तर पर 137 नए मामले पेंडिंग हो चुके हैं।