बीकानेर: शहीद व दिव्यांग सैनिकों के बच्चों को मिलेगी छात्रवृत्ति, शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश

बीकानेर। देश की रक्षा में शहीद हुए वीर जवानों और ड्यूटी के दौरान स्थायी रूप से दिव्यांग हुए सैनिकों के परिवारों के लिए शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। अब उनके आश्रित बच्चों को शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी, जिससे उन्हें आर्थिक संबल मिलने के साथ बेहतर भविष्य की राह भी आसान होगी।
इस योजना के तहत करगिल युद्ध सहित विभिन्न आपातकालीन अभियानों में शहीद हुए तथा स्थायी दिव्यांग सैनिकों के आश्रित विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। कक्षा 1 से 12 तक के नियमित छात्र-छात्राएं इसके पात्र होंगे। हालांकि, इसके लिए सरकारी या माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर से मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में अध्ययनरत होना अनिवार्य होगा। पात्र विद्यार्थियों को 2500 रुपए प्रति वर्ष छात्रवृत्ति दी जाएगी।
आवेदन के लिए अभिभावक के शहीद या स्थायी दिव्यांग सैनिक होने का प्रमाण-पत्र, जन आधार कार्ड सहित आवश्यक दस्तावेज संबंधित विद्यालय में जमा कराने होंगे। साथ ही, स्कूलों के प्रधानाचार्यों को 31 जुलाई तक शाला दर्पण पोर्टल पर विद्यार्थियों की जानकारी ऑनलाइन अपलोड करनी होगी।
सेवानिवृत्त सैनिकों की बेटियों के लिए विशेष योजना:-
शिक्षा विभाग ने सेवानिवृत्त सैनिकों की पुत्रियों के लिए भी अलग छात्रवृत्ति योजना लागू की है। इसके अंतर्गत कक्षा 11 व 12 में अध्ययनरत छात्राएं पात्र होंगी। उन्हें पिछली कक्षा में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। साथ ही, छात्रा किसी अन्य स्रोत से छात्रवृत्ति या भत्ता प्राप्त नहीं कर रही हो।
पात्र छात्राओं को भी 2500 रुपए प्रतिवर्ष दिए जाएंगे। यह राशि केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए ही मान्य होगी। यदि छात्रा उसी कक्षा में पुनः अध्ययन करती है, तो उसे दोबारा छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिलेगा।
तबादलों को लेकर सख्ती, तुरंत ज्वाइनिंग के निर्देश:-
वहीं, शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण आदेशों की अनदेखी करने वाले कार्मिकों पर सख्त रुख अपनाया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर ऐसे कार्मिकों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर नए पदस्थापन स्थल पर कार्यग्रहण सुनिश्चित कराने को कहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनवरी 2026 में जारी स्थानांतरण आदेशों के बावजूद कई कर्मचारी अब तक न तो पूर्व स्थान से कार्यमुक्त हुए हैं और न ही नए स्थान पर ज्वाइन किया है।
आदेशों की अनदेखी पर उठे सवाल:-
इन निर्देशों के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ मामलों में त्वरित कार्रवाई होती है, जबकि कई कार्मिक अब भी आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं। शिक्षक संगठन रेसटा ने सभी लंबित मामलों में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।