बीकानेर: अवैध धंधे से अर्जित 3 तस्करों की संपत्तियां होंगी फ्रीज, 23 अपराधी पुलिस की रडार पर; पढ़े खबर

बीकानेर: बीकानेर पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों से अर्जित अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने की रणनीति के तहत जिला पुलिस ने तीन और तस्करों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष इस्तगासे पेश किए हैं। इन आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वहीं 23 अन्य तस्कर और आदतन अपराधी भी पुलिस के रडार पर हैं।
पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने बताया कि रणजीतपुरा थाना क्षेत्र के चक 10 आरडीवाई निवासी प्रेमसुख उर्फ सोनू पुत्र जयसुखराम बिश्नोई, पूनमचंद पुत्र जयसुखराम बिश्नोई तथा श्रीडूंगरगढ़ थाना क्षेत्र के ठुकरियासर निवासी विकास भांभू पुत्र बजरंगलाल जाट के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ के तहत इस्तगासे पेश किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों ने मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों से अर्जित धन से संपत्तियां बनाई हैं।
संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर लगेगी रोक:-
धारा 68एफ के तहत जिन संपत्तियों के अवैध कमाई से अर्जित होने के पर्याप्त आधार मिलते हैं, उन्हें अस्थायी रूप से फ्रीज किया जाता है। इसके बाद जांच पूरी होने तक आरोपी इन संपत्तियों को बेच, हस्तांतरित या किसी अन्य तरीके से उपयोग नहीं कर सकेंगे। अंतिम फैसला सक्षम प्राधिकारी की जांच और आदेश के बाद लिया जाएगा।
अब तक 13 अपराधियों पर हो चुकी है कार्रवाई:-
बीकानेर जिला पुलिस अब तक 13 तस्करों और आदतन अपराधियों के खिलाफ अवैध संपत्तियों को लेकर कार्रवाई कर चुकी है। कई मामलों में अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए हैं, जबकि अन्य मामलों में कानूनी प्रावधानों के तहत संपत्तियों पर कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने 23 अन्य तस्करों और आदतन अपराधियों की भी सूची तैयार की है। इनकी चल-अचल संपत्तियों, बैंकिंग लेन-देन और आय के स्रोतों की गहन जांच की जा रही है। दस्तावेजों के सत्यापन में अवैध कमाई के साक्ष्य मिलने पर इनकी संपत्तियों को भी फ्रीज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
क्या है एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ?
एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ के तहत मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित होने का संदेह होने पर आरोपी की चल एवं अचल संपत्तियों को फ्रीज (सीज) किया जा सकता है। जांच पूरी होने तक इन संपत्तियों की बिक्री, हस्तांतरण या अन्य प्रकार का निस्तारण प्रतिबंधित रहता है। यदि जांच में संपत्ति अवैध आय से अर्जित होना सिद्ध हो जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी उसे जब्त करने का आदेश भी दे सकता है।