भारत–न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक डील : टैरिफ में राहत और 20 अरब डॉलर निवेश, भारतीय छात्रों-प्रोफेशनल्स के लिए नए रास्ते खुले

India–New Zealand FTA Signing: भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर आधिकारिक मुहर लग गई है, जो दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती देगा। इस समझौते से व्यापार प्रक्रियाएं आसान होंगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय छात्रों व प्रोफेशनल्स के लिए नए अवसर खुलेंगे। इसे भारत की सबसे तेजी से पूरी हुई व्यापार डील्स में से एक माना जा रहा है।
कैसे हुआ समझौता?
इस अहम समझौते पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के ट्रेड मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के बीच बातचीत मार्च 2025 में शुरू हुई थी और सिर्फ 9 महीने में दिसंबर 2025 तक पूरी हो गई। इससे पहले भी कई दौर की वार्ता हो चुकी थी, लेकिन भारत के डेयरी सेक्टर से जुड़ी चिंताओं के चलते बात आगे नहीं बढ़ पाई थी। इस बार दोनों पक्षों ने संतुलित रुख अपनाते हुए सहमति बनाई।
टैरिफ में राहत से क्या फायदा होगा?
समझौते के तहत न्यूजीलैंड अब भारत के कई उत्पादों पर लगने वाला टैरिफ खत्म करेगा। अभी टेक्सटाइल, लेदर, कारपेट, सिरेमिक और ऑटो पार्ट्स पर लगभग 10% तक टैक्स लगता था, जो अब हट जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद सस्ते और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे। चाय, कॉफी और मसालों जैसे कृषि उत्पादों को भी न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे।
भारत ने क्या छूट दी?
भारत ने करीब 70% प्रोडक्ट्स के लिए अपना बाजार खोला है। लेकिन 30% संवेदनशील चीजों को बाहर रखा है। डेयरी उत्पाद—जैसे दूध, पनीर, मक्खन और दही—को पूरी तरह बाहर रखा गया है ताकि देश के किसानों के हित सुरक्षित रह सकें। इसके अलावा कुछ पशु उत्पाद, चीनी, तेल, रत्न-आभूषण और चुनिंदा धातुओं को भी शामिल नहीं किया गया है।
हालांकि, सेब, कीवी और मनुका हनी जैसे उत्पादों को सीमित मात्रा (कोटा) में आयात की अनुमति दी जाएगी, जिससे धीरे-धीरे तकनीक और उत्पादन क्षमता में सुधार का रास्ता खुलेगा।
20 अरब डॉलर का निवेश:-
न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और अन्य क्षेत्रों में तेजी से विकास होने की उम्मीद है। साथ ही व्यापार से जुड़े नियमों को सरल बनाया जाएगा और विवाद निपटान की प्रक्रिया भी आसान होगी।
सेवाओं और नौकरियों के मौके:-
इस समझौते से सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा विस्तार होगा। न्यूजीलैंड ने 100 से अधिक सर्विस सेक्टर भारतीय कंपनियों और पेशेवरों के लिए खोल दिए हैं। भारत भी 100 से ज्यादा क्षेत्रों में अवसर देगा, हालांकि पूरी छूट सीमित सेक्टर्स में ही रहेगी।
भारतीय छात्रों के लिए भी यह राहत भरी खबर है कि अब उनकी संख्या पर कोई तय सीमा नहीं होगी। खासकर STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित) के छात्रों को पढ़ाई के बाद अधिक समय तक काम करने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा करीब 5000 भारतीय प्रोफेशनल्स को IT, हेल्थकेयर, शिक्षा, कंस्ट्रक्शन और पारंपरिक चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में काम करने के लिए वीजा सुविधा मिलेगी।
दोनों देशों के बीच व्यापार की स्थिति:-
पिछले कुछ वर्षों में भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 2024 में भारत का सेवाओं का निर्यात 13% बढ़कर 634 मिलियन डॉलर पहुंच गया, जबकि आयात 7% बढ़कर 611 मिलियन डॉलर रहा।
भारत से दवाइयां, मशीनरी, कपड़ा और कीमती पत्थरों का निर्यात होता है, जबकि न्यूजीलैंड से ऊन, धातु, फल, नट्स और एल्युमिनियम भारत आता है।
समझौता कब लागू होगा?:-
इस समझौते को लागू करने से पहले दोनों देशों की औपचारिक मंजूरी जरूरी है। भारत में यह प्रक्रिया सरकार के स्तर पर पूरी हो जाएगी, जबकि न्यूजीलैंड में इसे संसद की स्वीकृति की आवश्यकता होगी, जिसमें कुछ समय लग सकता है।