युद्ध का असर रसोई तक: 500 रुपए तक महंगे हुए खाद्य तेल, सोयाबीन-सरसों और पाम ऑयल की कीमतों में उछाल
श्रीगंगानगर: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई प्रभावित होने से श्रीगंगानगर सहित कई इलाकों में खाद्य तेलों की कीमतों में अचानक तेजी दर्ज की गई है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है।
सोयाबीन और पाम तेल की कमी के चलते बाजार में तेजी का माहौल है। इसका असर सरसों और मूंगफली तेल पर भी साफ नजर आ रहा है। जिले की मंडियों में पिछले कुछ दिनों में तेलों के दाम लगातार बढ़े हैं।
व्यापारियों के मुताबिक, सोयाबीन सीड्स के भाव में करीब 600 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है। पहले यह करीब 4800 रुपए प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर लगभग 5600 रुपए तक पहुंच गया है। वहीं सोयाबीन तेल के 15 किलो टिन में 150 से 200 रुपए की वृद्धि हुई है और इसका भाव करीब 2570 रुपए तक पहुंच गया है।
सरसों के बाजार में भी तेजी बनी हुई है। सरसों का भाव करीब 6000 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 6700 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। वहीं सरसों तेल के 15 किलो टिन में करीब 300 रुपए की बढ़ोतरी के साथ इसका रेट लगभग 2500 रुपए हो गया है।
मूंगफली तेल के दाम भी पीछे नहीं हैं। मूंगफली के भाव में 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल तक की तेजी आई है। मूंगफली तेल का 15 किलो टिन, जो पहले करीब 2500 रुपए में मिल रहा था, अब 2800 रुपए से अधिक में बिक रहा है।
तेल व्यापारी अमित चावला के अनुसार, सोयाबीन और पाम तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात होता है। मौजूदा हालात में आयात कम होने से बाजार में सप्लाई घट गई है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
जानकारी के अनुसार, मूंगफली की आपूर्ति मुख्य रूप से बीकानेर और गुजरात से होती है, जबकि सरसों का उत्पादन श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के साथ भरतपुर और कोटा क्षेत्रों में होता है। फिलहाल शहर में सरसों और मूंगफली तेल की मांग सबसे ज्यादा बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।