1.44 लाख करोड़ चुकाओ या पानी लेना बंद करो: पंजाब सीएम ने राजस्थान से मांगा 66 साल के पानी का हिसाब
Rajasthan News: सदियों से पानी की कमी झेलता आया राजस्थान इस बार अलग स्थिति में है। राज्य को पानी तो मिल रहा है, लेकिन उसके भुगतान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बड़ा दावा करते हुए राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि मांगी है। उनका कहना है कि करीब 66 सालों से पानी का भुगतान नहीं किया गया।
चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान मान ने स्पष्ट कहा कि या तो राजस्थान बकाया राशि चुकाए या फिर पंजाब से पानी लेना बंद करे।
1920 के समझौते से जुड़ा मामला:-
मान के मुताबिक, पानी के लिए यह व्यवस्था 1920 में ब्रिटिश ब्रिटिश शासन में हुई थी। उस समय बीकानेर के महाराजा और बहावलपुर रियासत के बीच समझौता हुआ था, जिसके तहत राजस्थान फीडर के जरिए बीकानेर और श्रीगंगानगर क्षेत्रों तक करीब 18,000 क्यूसेक पानी पहुंचाया जाता है। समझौते में प्रति एकड़ के हिसाब से पानी का शुल्क तय किया गया था और राजस्थान 1960 तक इसका भुगतान करता रहा।
सिंधु जल समझौते के बाद बदली स्थिति:-
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि 1960 में सिंधु जल समझौता लागू होने के बाद राजस्थान ने पानी लेना तो जारी रखा, लेकिन भुगतान बंद कर दिया। वहीं पंजाब ने भी उस समय इस मुद्दे पर सख्ती नहीं दिखाई। मान का दावा है कि 1960 से 2026 तक का हिसाब जोड़ने पर बकाया राशि करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये बनती है।
“पानी चाहिए तो भुगतान भी करना होगा”
मान ने दो टूक कहा कि राजस्थान पानी तो 1920 के समझौते के तहत ले रहा है, लेकिन भुगतान के मामले में 1960 के नियमों का हवाला दे रहा है। ऐसे में या तो पुराने समझौते को खत्म किया जाए या फिर पानी की सप्लाई रोक दी जाए।
बैठक के लिए भेजा गया पत्र:-
इस विवाद को लेकर पंजाब सरकार ने राजस्थान को बैठक के लिए पत्र भी भेजा है। मान ने यह भी कहा कि सतलुज-यमुना लिंक नहर के जरिए पानी की मांग करने वाला राज्य इस बड़े बकाया मुद्दे पर चुप है। उन्होंने संकेत दिया कि पंजाब सरकार इस मामले को अब गंभीरता से आगे बढ़ाएगी।