Sheetala Ashtami 2026: 11 या 12 मार्च कब है बसौड़ा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी (बसौड़ा) का राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में विशेष महत्व है। इस पर्व को होली के बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन भक्त माता शीतला की पूजा करते हैं, जिन्हें संक्रामक और चर्म रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है।

इस दिन व्रती और उनका परिवार एक दिन पहले बनाया गया बासी या ठंडा भोजन ग्रहण करते हैं, इसलिए इस पर्व को बसौड़ा भी कहा जाता है। इस बार तिथि को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम है, इसलिए लोग सही दिन और शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं।

11 मार्च को मनाई जाएगी शीतला अष्टमी:-

पंचांग के अनुसार शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त माता शीतला की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करेंगे।

क्यों कहा जाता है ‘बसौड़ा’

शीतला अष्टमी को बसौड़ा कहने के पीछे बासी भोजन की परंपरा जुड़ी है। ‘बसौड़ा’ शब्द हिंदी के ‘बासी’ शब्द से बना माना जाता है। इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता और चूल्हा नहीं जलाया जाता।

माता शीतला को एक दिन पहले (सप्तमी की रात) बनाया गया भोजन अर्पित किया जाता है। यही कारण है कि लोक परंपरा में इस पर्व को बसौड़ा या बसोड़ा कहा जाता है।

बसौड़ा पूजन का शुभ मुहूर्त:-

पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 11 मार्च को सुबह 1:54 बजे से शुरू होकर 12 मार्च को सुबह 4:19 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए शुभ समय सुबह 6:36 बजे से शाम 6:27 बजे तक माना गया है। इस मुहूर्त में माता शीतला की पूजा करने से घर-परिवार को रोगों से रक्षा मिलने की मान्यता है।

शीतला माता की पूजा विधि:-

शीतला अष्टमी के दिन पूजा में ठंडा या बासी भोजन चढ़ाने का विशेष महत्व है। भक्त माता को यह प्रसाद अर्पित कर परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि बसौड़ा पूजन से घर में रोग-व्याधि दूर होती है।

क्यों मनाया जाता है बसौड़ा:-

होली के बाद फाल्गुन माह समाप्ति की ओर होता है और चैत्र माह की शुरुआत के साथ गर्मी बढ़ने लगती है। इस समय चेचक, खसरा और त्वचा से जुड़े संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। प्राचीन मान्याताओं के अनुसार माता शीतला को आरोग्य की देवी माना जाता है. हिंदू धर्म में उन्हें विशेष रूप से संक्रमण और ताप (गर्मी) से होने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने वाली शक्ति माना गया है।

माता शीतला को क्यों माना जाता है आरोग्य की देवी:-

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब ज्वरासुर नामक असुर ने दुनिया में बुखार और बीमारियां फैला दी थीं, तब माता कात्यायनी ने शीतला का रूप धारण कर उसे पराजित किया और लोगों को रोगों से मुक्ति दिलाई।

वैज्ञानिक तर्क ऋतु परिवर्तन और स्वास्थ्य:-

बसौड़ा (शीतला अष्टमी) होली के बाद आती है, जब मौसम तेजी से  सर्दियों से गर्मियों की ओर बदलता है। यह समय संक्रामक रोग फैलने का सबसे अच्छा जरिया माना गया है।  इस दिन ठंडा भोजन (बासी भोजन) खाने की परंपरा हमें यह सिखाती है कि अब चूल्हा (गर्मी) कम करना है और शरीर को ठंडी तासीर वाली चीजों की ओर ले जाना है।