क्या राजस्थान में लगेगी ‘सोशल मीडिया’ पर पाबंदी? आखिर क्यों हो रही ये गंभीर चर्चा? पढ़े पूरी खबर

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जयपुर। तेजी से बदलते डिजिटल दौर में बच्चों का बचपन स्क्रीन के साये में सिमटता जा रहा है। राजस्थान विधानसभा में शाहपुरा से कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए कहा कि मोबाइल फोन जहां पढ़ाई का जरिया बना है, वहीं इसका अनियंत्रित उपयोग बच्चों को गलत दिशा में ले जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए राजस्थान को डिजिटल नियंत्रण की दिशा में ठोस और सख्त कदम उठाने चाहिए।

शिक्षा के साथ बढ़ रहा डिजिटल खतरा:-

विधायक ने सदन में कहा कि ऑनलाइन शिक्षा और अध्ययन सामग्री के लिए मोबाइल आवश्यक हो गया है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव तेजी से सामने आ रहे हैं।

  • अपराधी प्रवृत्तियों का प्रभाव: सोशल मीडिया पर दिखाए जा रहे हथियारों, गैंगस्टर छवि और हिंसक कंटेंट से बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। रील्स और अल्गोरिथम के कारण बच्चे हथियारों और हिंसा वाले कंटेंट की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
  • साइबर बुलिंग और अश्लील सामग्री: अनियंत्रित इंटरनेट उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहा है। भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री तक आसान पहुंच चिंता का विषय बनती जा रही है।

अन्य राज्यों और देशों का उदाहरण:-

मनीष यादव ने कर्नाटक, गोवा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों का हवाला देते हुए कहा कि वहां भी बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर नीति बनाने पर चर्चा हो रही है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए बताया कि:

  • ऑस्ट्रेलिया में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं।
  • चीन, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड और इटली जैसे देशों में भी बच्चों के लिए इंटरनेट उपयोग को लेकर कड़े दिशा-निर्देश बनाए गए हैं।

क्या है समाधान? विधायक का ‘प्लान’

विधायक ने सरकार के समक्ष कुछ ठोस सुझाव भी रखे:-

  • 16 वर्ष से कम आयु के लिए अलग डिजिटल विनियमन नीति।
  • रात के समय मोबाइल और एप्स पर ‘ऑटो लॉक’ जैसी व्यवस्था।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य पेरेंटल कंट्रोल और सेफ मोड।
  • डिजिटल लत से जूझ रहे बच्चों के लिए विशेष हेल्पलाइन और परामर्श केंद्र।