राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले धीरेंद्र शास्त्री के बयान से गरमाई राजनीति, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले धीरेंद्र शास्त्री के बयान से गरमाई राजनीति, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
Rajasthan Panchayat Elections 2026: पंचायत और निकाय चुनावों से पहले राजस्थान की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने 30 साल पुराने उस प्रावधान को समाप्त करने का फैसला किया है, जिसके तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति चुनाव लड़ने के अयोग्य माने जाते थे।
सरकार इस कदम को बदलते सामाजिक परिदृश्य के अनुरूप बता रही है, जबकि विपक्ष ने इसे वैचारिक दबाव से प्रेरित निर्णय करार दिया है।
क्या बदला है नियम में?
राज्य सरकार ने राजस्थान पंचायतीराज संशोधन विधेयक और राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। अब दो से अधिक बच्चों वाले लोग भी पंच, सरपंच, पार्षद और मेयर का चुनाव लड़ सकेंगे।
मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि 1995 में यह नियम जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में लोकतांत्रिक भागीदारी को सीमित रखना उचित नहीं है।
1995 के फैसले से 2026 तक:-
यह प्रावधान 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत के कार्यकाल में लागू किया गया था। उस दौर में राजस्थान जनसंख्या नियंत्रण के कड़े कानून लागू करने वाले राज्यों में शामिल था।
अब अपनी ही पार्टी की पुरानी नीति को पलटकर भजनलाल सरकार ने एक नई बहस छेड़ दी है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे उन कई स्थानीय कार्यकर्ताओं को राहत मिलेगी जो तीसरी संतान के कारण चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे।
विपक्ष का हमला:-
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार जनसंख्या नियंत्रण जैसे गंभीर मुद्दे पर दोहरी नीति अपना रही है। उन्होंने कहा कि यह कदम वैचारिक दबाव में उठाया गया है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि सीमित संसाधनों वाले देश में परिवार नियोजन के संदेश को कमजोर करना उचित नहीं है।
धीरेंद्र शास्त्री के बयान से जुड़ी चर्चा:-
हाल ही में पुष्कर में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदुओं से अधिक संतानों को जन्म देने की अपील की थी, जिसके बाद यह मुद्दा और चर्चा में आ गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार का फैसला इसी पृष्ठभूमि में लिया गया है।
हालांकि उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक और व्यावहारिक आधार पर लिया गया है और इसका किसी धार्मिक बयान से संबंध नहीं है। राठौड़ ने जोर देकर कहा कि आम जनता वैसे भी जागरूक है, लेकिन चुनावी अयोग्यता का यह प्रावधान कई योग्य उम्मीदवारों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूर रख रहा था।